क्या धार्मिक नफ़रत का शिकार बना अयान सैफी?

कभी-कभी एक खबर सिर्फ खबर नहीं होती… वो एक मां की टूटती दुनिया होती है, एक घर की बुझती रोशनी होती है… और एक सवाल बनकर रह जाती है—आख़िर इंसाफ कब मिलेगा?


दिल्ली के त्रिलोकपुरी से आई ये खबर दिल को झकझोर देती है। 16 साल का मासूम अयान सैफी


… एक ऐसा बच्चा, जो अभी जिंदगी को समझ ही रहा था, सपने देख रहा था… अचानक इस दुनिया से छीन लिया गया।  


बताया जा रहा है कि अयान अपने इलाके के पास मौजूद पार्क में था, जब कुछ लोगों ने उसे घेर लिया। वो लोग सिर्फ झगड़ा करने नहीं आए थे… उनके हाथों में चाकू थे, और इरादे बहुत खतरनाक। अयान को दौड़ा-दौड़ा कर बेरहमी से चाकुओं से गोदा गया।


उसकी मां के लिए वो सिर्फ बेटा नहीं था… उसकी पूरी दुनिया था। “मेरा एक ही बच्चा था…” — ये कहते हुए मां की आवाज़ कांप जाती है। वो रोते-रोते बस एक ही बात कह रही है— मुझे इंसाफ चाहिए… मेरे बेटे के कातिलों को सज़ा चाहिए।


पर इस कहानी में दर्द सिर्फ इतना ही नहीं है… परिवार का आरोप है कि अयान को पहले से धमकियां मिल रही थीं। उसे मुल्ला, मुसल्ला, कटुवा कहकर बुलाया जाता था, डराया-धमकाया जाता था… लेकिन पुलिस में शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। काश अगर सुनवाई हो जाती तो आज एक माँ की दुनिया नहीं उजड़ी होती।


परिवार का कहना है कि ये सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सोची-समझी साजिश थी। कई लोगों ने मिलकर उसे घेरा, हमला किया… और फिर सब कुछ खत्म कर दिया।


मीडिया से बातचीत में परिवार ने बताया कि अयान पर हमला करने वाले लड़के नहीं थे, बल्कि लंबे-चौड़े, कम से कम 30-35 साल के आदमी थे। अयान की माँ का कहना है कि मेरा बच्चा तो बस 16 साल का था। जब वह अपने एक दोस्त के साथ पार्क में खेल रहा था, तो कम से कम 8-10 लोगों ने उसे घेर लिया। उसने कभी किसी का कुछ बुरा नहीं किया था. वे उसे मुझसे छीन ले गए.


सबसे बड़ा सवाल यहीं खड़ा होता है—

अगर पहले ही सुनवाई हो जाती… अगर समय पर कदम उठाया जाता… तो आज अयान जिंदा होता!


अब पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है, आरोपियों की तलाश जारी है… लेकिन एक मां के लिए ये सब काफी नहीं है। उसके लिए तो उसकी दुनिया पहले ही खत्म हो चुकी है।


आख़िर में एक सवाल:

जब तक इंसाफ मिलेगा… क्या तब तक उस मां का दर्द कम हो पाएगा?

या ये भी एक और कहानी बनकर रह जाएगी… जिसे कुछ दिनों बाद हम सब भूल जाएंगे?

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