मुझको कैसा दिन दिखाया ज़िन्दगी ने

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  • Shah Nawaz
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  • मुझको कैसा दिन दिखाया ज़िन्दगी ने
    हर इक को मुझ पर हंसाया ज़िन्दगी ने

    तुझको खोकर ज़िन्दगी से जब मिले थे
    मौत की हद तक सताया ज़िन्दगी ने

    हमको बहुत नाज़ था अपनी हंसी पर
    खून के आंसू रुलाया ज़िन्दगी ने

    सुन के हर इक शेर यह दिल रो पड़ा था
    जब गीत मेरा गुनगुनाया ज़िन्दगी ने

    यूँ तो मरते हैं जहाँ में लाखों लोग
    उस मौत पर आंसू बहाया ज़िन्दगी ने



    - शाहनवाज़ सिद्दीकी 'साहिल'




    Keywords: Death, Gazal, Ghazal, आंसू, गीत, गुनगुनाया, ज़िन्दगी, नाज़, मौत, रुलाया, शेर, सताया, हंसी

    37 comments:

    1. ज़िन्दगी के कई रंग दिखाती ख़ूबसूरत ग़ज़ल के लिए दिली मुबारकबाद !

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    2. सुन के हर इक शेर यह दिल रो पड़ा था
      जब गीत मेरा गुनगुनाया ज़िन्दगी ने

      -वाह!! बेहतरीन..

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    3. shaahnvaaz bhaayi khush nsib ho jo dusron ki hnsi ki vjh bne ho , jnaab aapne hnsi or gm kaa sngm bhut khub andaaz men pesh kiya he . akhtar khan akela kota rajsthan

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    4. बहुत से रंग दिखाए ज़िंदगी के ..

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    5. आपका ब्लाग अच्छा लगा .ग्राम चौपाल मे आने के लिए धन्यवाद .आगे भी मिलते रहेंगें

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    6. जिंदगी भी अजीब है क्या क्या रंग दिखाती है ..... अच्छी ही नहीं लाजवाब रचना

      http://oshotheone.blogspot.com

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    7. ज़िन्दगी के रंग कई रे...
      बेहद्द खूबसूरत अशआर हैं..
      शुक्रिया..!

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    8. यूँ तो मरते हैं जहाँ में लाखों लोग
      उस मौत पर आंसू बहाया ज़िन्दगी ने


      क्या बात कही है ,सच में बेहतरीन

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    9. बेहतरीन। लाजवाब।

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    10. शुक्रगुजार हूँ मै उसकी उसी दिन से जिस दिन
      "प्रेमरस" से रूबरू करवा दिया था जिंदगी ने.

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    11. उम्दा ग़ज़ल शाहनवाज़ भाई..शुक्रिया

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    12. शिक्षा का दीप जलाएं-ज्ञान प्रकाश फ़ैलाएं

      शिक्षक दिवस की बधाई

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    13. ज़िन्दगी के ऊपर बहुत दर्द भरी ग़ज़ल लिखी है आपने. सवाल-जवाब फोरम बना कर बहुत अच्छा काम किया है.

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    14. उम्दा भावनात्मक प्रस्तुती...

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    15. shbdo ke smndr me lhro ki trha doobti utrati jindgi ke tmam phluo ko drshati behtreen prstuti .

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    16. हमको बहुत नाज़ था अपनी हंसी पर
      खून के आंसू रुलाया ज़िन्दगी ने

      वाह वा...वाह वा...बहुत खूब....लिखते रहें...
      नीरज

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    17. यही तो है ज़िन्दगी..कभी ख़ुशी कभी ग़म..

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    18. ख़ूबसूरत अशआर आप मुबारक बाद के मुस्तहक़ हैं।जैसी हमारी रिवायत है इस गज़ल में शाह, सिद्धिक या साहिल को क्यूं नहीं दिखाया ज़िन्दगी ने।

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    19. ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
      ‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
      हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

      मालीगांव
      साया
      लक्ष्य

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    20. हारना नहीं , हौसला रखना है हरदम
      हौले हौले पाठ पढ़ाया जिंदगी ने

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    21. paki gazal per pakad achi hain likhte rahe

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    22. तुझको खोकर ज़िन्दगी से जब मिले थे
      मौत की हद तक सताया ज़िन्दगी न
      beautiful ... aap bohot accha likhte hai.... :)

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    23. इस सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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    24. सर, बहुत बहुत बढ़िया रचना के लिए. वाह क्या लिखा है.
      --
      धनतेरस व दिवाली की सपरिवार बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं.
      -
      वात्स्यायन गली

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    25. शानदार प्रयास बधाई और शुभकामनाएँ।

      एक विचार : चाहे कोई माने या न माने, लेकिन हमारे विचार हर अच्छे और बुरे, प्रिय और अप्रिय के प्राथमिक कारण हैं!

      -लेखक (डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश') : समाज एवं प्रशासन में व्याप्त नाइंसाफी, भेदभाव, शोषण, भ्रष्टाचार, अत्याचार और गैर-बराबरी आदि के विरुद्ध 1993 में स्थापित एवं 1994 से राष्ट्रीय स्तर पर दिल्ली से पंजीबद्ध राष्ट्रीय संगठन-भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान- (बास) के मुख्य संस्थापक एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जिसमें 05 अक्टूबर, 2010 तक, 4542 रजिस्टर्ड आजीवन कार्यकर्ता राजस्थान के सभी जिलों एवं दिल्ली सहित देश के 17 राज्यों में सेवारत हैं। फोन नं. 0141-2222225 (सायं 7 से 8 बजे), मो. नं. 098285-02666.
      E-mail : dplmeena@gmail.com
      E-mail : plseeim4u@gmail.com
      http://baasvoice.blogspot.com/
      http://baasindia.blogspot.com/

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    26. very emotional ....

      dard jhalakta hai es gazal mai...

      har shabad sachai ugal raha hai

      bht hi sundar likha hai....lovely:)

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    27. वाह ये ब्लाग तो आज देखा। तो आप गज़ल भी लिखते हैं मुझे नही पता था।
      हमको बहुत नाज़ था अपनी हंसी पर
      खून के आंसू रुलाया ज़िन्दगी ने
      वाह क्या बात है।
      सुन के हर इक शेर यह दिल रो पड़ा था
      जब गीत मेरा गुनगुनाया ज़िन्दगी ने
      बहुत उमदा शेर है। बधाई।

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