धौखा है हज सब्सिडी

  • Thursday, May 10, 2012
  • by
  • Shah Nawaz
  • हज सब्सिडी के नाम पर मुसलमानो को धोखा दिया जा रहा है। हमारे देश से हज यात्रा के लिए डेढ़ लाख से अधिक लोग हर वर्ष साउदी अरब की यात्रा पर जाते हैं। जिसमें से सवा लाख लोग हज कमेटी से तथा बाकी अलग-अलग प्राइवेट टूर्स ऑपरेटर्स के ज़रिये जाते हैं।

    हमारे देश की सरकार इस यात्रा पर किराए में सब्सिडी देने की बात करती है, जो कि पूरी तरह धौखा है। हज के लिए जेद्दाह जाने का जो किराया आम दिनों में 16-17 हज़ार होता है, इंडियन एयर लाइन्स के द्वारा सरकार वही किराया हज के दिनों के करीब आते-आते कई गुना बढ़ा देती है। पिछले वर्ष यह किराया तकरीबन 52 हज़ार था, इस साल यह करीब 55 हज़ार तक पहुँचने की उम्मीद है।

    आम दिनों में पवित्र शहर मक्का में "उमरा" के लिए 20 दिन की यात्रा का खर्च तकरीबन 33-35 हज़ार रूपये ही आता है लेकिन हज के दिनों में यही खर्च बढ़कर दुगने से भी अधिक हो जाता है। हज यात्रा आम तौर पर 40 दिन तक चलती है और इसमें खर्च सवा लाख रूपये के आस-पास होता है। ऐसा केवल इसलिए है क्योंकि हज पर जाने के लिए केवल एयर इंडिया तथा सउदी एयरवेज़ को ही इजाज़त है। सरकार सउदी अरब सरकार के साथ मिलकर यह गोरखधंधा चला रही है, इसी मोनोपोली का फायदा उठाकर हर साल किराया इतना बढ़ा दिया जाता है जिससे कि मुसलमानों को सब्सिडी के नाम पर ठगा जा सके।

    यह खुली लूट नहीं है तो और क्या है? अगर डेढ़-दो लाख लोग एक साथ मिलकर किसी भी एयर लाइन्स से टिकट लें तो क्या वहां किराए में छूट नहीं मिलेगी? लेकिन सरकार द्वारा नियुक्त हज कमिटी इस मसले पर चुप है, आखिर क्यों? उन्हें साफ़ करना चाहिए कि वह हाजियों की नुमाइंदगी करती हैं या सरकार की।

    इस कदम से सरकार की नियत का अंदाजा लग जाता है, कि वह केवल मुसलमानों की मदद करने का ढोंग करती है, अगर सरकार वाकई मुसलमानों का की मदद करना चाहती तो इस गलत रास्ते को क्यों चुनती है?

    जिस छूट पर हज यात्रियों का हक़ है, सरकार उसी हक को सब्सिडी नामक भीख के तौर पर देती है। कम से कम हज यात्रियों का पैसा ही उन्हें छूट नामक झूट के नाम से देती तो भी चलता लेकिन सब्सिडी के नाम से तो यह सरकार की खुली लूट है।

    आज ज़रूरत है कि यह आवाज़ उठाई जाए कि या तो हमारा हक दो नहीं तो कम से कम इस सब्सिडी नाम की भीख को समाप्त करो। वैसे भी हज जैसी पवित्र यात्रा के किराए पर सरकार की (झूठी) मदद जायज़ ही नहीं है, हज के लिए जाने वाले जहाँ डेढ़-दो लाख रूपये प्रति व्यक्ति खर्च करते हैं, क्या वह थोडा और पैसा खर्च नहीं कर सकते हैं?



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    ग़ज़ल और ट्विटर "अँधेरी रात है खुद का भी साया साथ नहीं"

  • Monday, May 7, 2012
  • by
  • Shah Nawaz
  • यह ग़ज़ल मैंने मुक़म्मल तौर पर अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखी है. ट्विटर मुझे वैसे भी फेसबुक से ज्यादा पसंद है, इसमें सबसे अच्छी बात मुझे यह लगती है कि इसे मोबाइल से आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है. जैसे ही समय मिलता गया, ग़ज़ल के शेअर अपने मोबाइल फोन से ट्विटर पर शेयर करता रहा और इस तरह यह मुक़म्मल हुई और अब आपके सामने पेश है...



    अँधेरी रात है खुद का भी साया साथ नहीं
    कोई अपना ना हो, ऐसी भी कोई बात नहीं

    साथ रहता है जो, ज़रूरी तो नहीं साथ ही हो
    बात ऐसी भी नहीं, मिलते हो जज़्बात नहीं

    कैफियत रात की कुछ ऐसी हुई जाती है
    पास लेटा है जो, उससे ही मुलाक़ात नहीं

    रिश्ता नैनो का यूँ बारिशों के साथ हुआ
    आज बादल को ही पहचानती बरसात नहीं

    टूटकर चाहता हूँ, चाहने से क्या हासिल
    अगर उसके लिए यह चाहतें सौगात नहीं

    अपनी हस्ती को फ़ना कर दिया जिसकी धुन में
    उसकी नज़रों में लड़कपन है यह सादात नहीं

    उम्र भर जिसको समझते रहे उरूज़-ए-इश्क
    वोह ऐसा ख्वाब था, जिसकी कोई शुरुआत नहीं




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    सीने की बुझी राख में अंगारों की दमक बाकी है

  • Monday, April 30, 2012
  • by
  • Shah Nawaz



  • सीने की बुझी राख में अंगारों की दमक बाकी है
    हौसले पस्त क्यों हों, जोशीली खनक बाकी है


    नादां ना कर गुमां, कि बूढ़ा हो चला है शेर
    वोह बाजुओं का ज़ोर और दांतों की चमक बाकी है


    मुझको इस सफ़र का थका हुआ रहबर न समझना
    बस हम-कदम रहो, अगर चलने की सनक बाकी है



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    क्या 'हलाला' शरिया कानून का हिस्सा है?

  • Thursday, April 5, 2012
  • by
  • Shah Nawaz
  • हलाला शरियत का कानून नहीं है बल्कि इस्लाम के खिलाफ है। मैंने पिछली पोस्ट में बताया था कि इस्लाम के अनुसार तलाक़ क्या होती है और एक बार तलाक़ होने के बाद कोई भी महिला अपनी मर्ज़ी से दूसरा विवाह करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होती है। हाँ अगर किसी महिला की या उसके पति की उससे नहीं बनती और बदकिस्मती से फिर से तलाक़ की स्थिति आ जाती है। तो ऐसी अवस्था में वह महिला अपनी इच्छा से फिर से पहले पति से शादी कर सकती है। 


    क्या 'हलाला' शरिया कानून का हिस्सा है?


    'हलाला' शरिया कानून का हिस्सा नहीं है, बल्कि तलाक़ को इसलिए सख्त बनाया गया है कि पुरुष महिलाओं पर ज्यादतियां करने की नियत से इसका मज़ाक ना बना लें, जब चाहे तलाक़ दिया और फिर जब चाहे दुबारा विवाह कर लिया। इसीलिए तलाक़ के बाद वापिस दुबारा शादी की संभावना लगभग समाप्त हो जाती है। यहाँ यह भी बताता चलूँ कि इस्लाम में तलाक़ को सबसे ज्यादा नापसंदीदा काम माना गया है और केवल विशेष परिस्थितियों के लिए ही इसका प्रावधान है।

    एक बार तलाक़ होने के बाद कोई भी महिला अपनी मर्ज़ी से दूसरा विवाह करने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र होती है। हाँ अगर किसी तलाकशुदा महिला का अपने पति या उसके पति का उसके साथ तालमेल नहीं बैठता और बदकिस्मती से फिर से तलाक़ की स्थिति आ जाती है। तो ऐसी अवस्था में वह महिला अपनी इच्छा से फिर से पहले पति से शादी कर सकती है। अगर कोई जानबूझकर इस प्रक्रिया को दूबारा शादी के लिए इस्तेमाल करता है तो इस्लामिक कानून के मुताबिक उनके लिए बेहद सख्त सज़ाओं का प्रावधान है। सन्दर्भ के लिए यह लिंक देखा जा सकता हैं.

    http://www.islamawareness.net/Talaq/talaq_fatwa0008.html




    निकाह की हर एक सूरत में महिला और पुरुष दोनों की 'मर्ज़ी' आवश्यक है

    इस्लामिक विवाह की रीती में किसी भी स्थिति में बिना किसी महिला अथवा पुरुष की मर्ज़ी के शादी हो ही नहीं सकती है। अगर किसी महिला / पुरुष से ज़बरदस्ती 'हाँ' कहलवाई जाती है और हस्ताक्षर करवाए जाते हैं तो इस सूरत में विवाह नहीं होता है। और क्योंकि ऐसी स्थिति में क्योंकि विवाह वैध नहीं होता है इसलिए अलग होने के लिए तलाक़ की आवश्यकता भी नहीं होती है। उपरोक्त संदर्भो से यह साफ़ हो जाता है कि हलाला की इस्लाम में रत्ती भर भी जगह नहीं है।
    मैंने एक बार तलाक़ हो जाने पर दुबारा विवाह को लगभग नामुमकिन इसलिए कहा था क्योंकि किसी भी महिला की मर्ज़ी के बिना पहली या दूसरी शादी हो ही नहीं सकती है और कोई भी महिला ऐसी घिनौनी हरकत को जानबूझकर क़ुबूल नहीं करेगी। अगर किसी महिला या पुरुष का इस्लाम धर्म में विश्वास है तब तो वह ऐसा गुनाह बिलकुल भी नहीं करेंगे और अगर विश्वास ही नहीं है तो उन्हें ऐसा करने की आवश्यकता ही नहीं है, वह देश के सामान्य कानून के मुताबिक कोर्ट में शादी कर सकते हैं।


    इस विषय के सन्दर्भ को समझने तथा टिप्पणियों के माध्यम से विचारों के आदान-प्रदान के लिए मेरी पिछली पोस्ट पढ़ें.

    तलाक़ पर लेख और मेरी प्रतिक्रिया





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    गायब होती टिप्पणियों का राज़ - शाहनवाज

  • Saturday, March 31, 2012
  • by
  • Shah Nawaz
  • हमने ब्लॉग बुलेटिन पर गायब होती टिप्पणियों का राज़ क्या बताया, गूगल बाबा हमसे नाराज़ हो गए और हमारी पोस्ट की फीड को गूगल रीडर पर अपडेट करने से इंकार कर दिया. दोपहर ब्लॉग बुलेटिन पर पोस्ट डाली थी और फीड है कि अब तक अपडेट नहीं हुई है. अब जब फीड अपडेट नहीं हुई है तो पाठकों तक नई पोस्ट की खबर कैसे पहुंचेगी भला? बताता चलूँ कि हर एक ब्लॉग की पोस्ट गूगल रीडर के द्वारा ही फोलोवर्स तक पहुँचती है, चाहे वोह सीधे रीडर पर जाकर, ब्लोगर डेश बोर्ड पर अथवा अपने ब्लॉग पर लगे विजेट पर ताज़ा पोस्ट पढ़ पाते हैं. यहाँ तक कि हमारीवाणी जैसे ब्लॉग संकलक भी तभी पोस्ट अपडेट कर पाते हैं.

    इस अकस्मक समस्या के हल के लिए हमने यह रास्ता निकला है. अब देखते हैं गूगल बाबा नज़रे करम करते हैं कि नहीं. आप तब तक नीचे दिए लिंक पर जाकर देखिये गायब होती टिप्पणियों का राज़ तथा ब्लॉग जगत की ताज़ा हलचल.

    ब्लॉग बुलेटिन: गायब होती टिप्पणियों का राज़ - शाहनवाज़






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    तलाक़ पर लेख और मेरी प्रतिक्रिया

  • Friday, March 30, 2012
  • by
  • Shah Nawaz
  • सबसे पहले तो हमें यह पता होना चाहिए कि इस्लाम में विवाह एक कोंट्रेक्ट मैरिज होती है जिसमें क़ाज़ी, वकील तथा 2 गवाहों के सामने कुबूल कर लेने से निकाह हो जाता है तथा विशेष परिस्थितिओं में विवाह को 'तलाक' अथवा 'खुला' के द्वारा विच्छेद किया जा सकता है। मुस्लिम विवाह में गवाह, वकील तथा क़ाज़ी केवल इसलिए होते हैं जिससे कि कोई भी पक्ष विवाह से मुकर ना जाए। (वैसे तो आज हिन्दू विवाह को भी कोंट्रेक्ट मैरिज बना दिया गया हैं, क्योंकि उसमें भी तलाक़ का प्रावधान कर दिया गया है)

    ठीक इसी तरह जब यह एहसास हो जाए कि अब साथ रहना नामुमकिन है और ज़िन्दगी की गाडी को आगे बढाने के लिए अलग होना ही एकमात्र तरीका बचा है, तब ऐसे हालात के लिए तलाक़ का प्रावधान है।
    तलाक़ का इस्लामिक तरीका यह है कि जब यह अहसास हो कि जीवन की गाडी को साथ-साथ चलाया नहीं जा सकता है, तब क़ाज़ी मामले की जाँच करके दोनों पक्षों को कुछ दिन और साथ गुज़ारने की सलाह दे सकता है अथवा गवाहों के सामने पहली तलाक़ दे दी जाती है, उसके बाद दोनों को 40 दिन तक अच्छी तरह से साथ रहने के लिए कहा जाता है। अब अगर 40 दिन के बाद भी उन्हें लगता है तो फिर दूसरी बार गवाहों के सामने "तलाक़" कहा जाता है, इस तरह दो "तलाक" हो जाती हैं और फिर से 40 दिन तक साथ रहा जाता है। अगर फिर से 40 दिन बाद भी लगता है कि साथ नहीं रहा जा सकता है तब जाकर तीसरी बार तलाक़ दी जाती है और इस तरह तलाक़ मुक़म्मल होती है।

    इसमें मुस्लिम समाज का "हनफी" मसलक में एक ही समय में "तीन तलाक़" को भी सही माना जाता हैं, हालाँकि वह भी इस तरीके को अच्छा तरीका नहीं मानते। अन्य मुस्लिम उलेमा एक समय में तीन तलाक़ दिए जाने को "तलाक़" नहीं मानते हैं और कई मुस्लिम देशों में इस तरह से तलाक देने पर व्यक्ति के विरुद्ध सज़ा का प्रावधान है।



    महिलाओं को तलाक़ का हक

    यह कहना गलत है कि महिलाओं को तलाक़ का हक नहीं है, बल्कि उनको तुरंत तलाक़ का हक है। अगर किसी महिला का पति शराबी, जुआरी, नामर्द, मार-पीट करने वाला या किसी ऐसी सामाजिक बुराई में लिप्त है जो कि समाज में लज्जा का कारण हो तो उसे तलाक़ लेने का हक है। इसके लिए उसे भी क़ाज़ी के पास जाना होता है। इसके साथ-साथ ऐसी स्थिति में उसको 40-40 दिन तक इंतज़ार करने की भी आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि महिला के आरोप सही पाए जाने की स्थिति में फ़ौरन विवाह विच्छेद का अधिकार मिल जाता है, जिसको 'खुला' कहा जाता है।

    इस विषय में कुछ लोगो का यह कहना है कि जब विवाह पति-पत्नी की मर्ज़ी से होता है तो तलाक़ किसी एक की मर्ज़ी से कैसे हो सकता है। मेरे विचार से ऐसा कहना व्यवहारिक नहीं है, सम्बन्ध हमेशा दो लोगो की मर्ज़ी से ही बनते हैं परन्तु किसी एक की भी मर्ज़ी ना होने से सम्बन्ध समाप्त हो जाते हैं। ज़रा सोचिये अगर किसी महिला का पति उस पर ज्यादतियां करता है, यातनाएं देता है और तलाक़ देने के लिए बिलकुल भी तैयार नहीं है तो क्या ऐसे में बिना उसकी मर्जी के तलाक़ के प्रावधान का ना होना जायज़ कहलाया जा सकता है?

    एक पुरुष और महिला के दिलों का मिलना और साथ-साथ सामाजिक बंधन में बंध कर रहना विवाह है तो रिश्तों में तनाव या अन्य किसी कारण से साथ-साथ ना रह पाने की स्थिति का नाम 'तलाक़' है।



    [इस लेख की अगली कड़ी "हलाला" के बारे में जानने के लिए यहाँ क्लिक करें]

    क्या 'हलाला' शरिया कानून का हिस्सा है?






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    एक शाम ढली, फिर सुबह नई

  • Thursday, March 15, 2012
  • by
  • Shah Nawaz

  • 15 मार्च, अर्थात अंग्रेजी कैलेण्डर के अनुसार आज मेरा जन्मदिवस है, हालाँकि भारतीय कैलेंडर के अनुसार तो मेरा जन्मदिवस 'चैत्र मास' की पहली तिथि अर्थात रंगों की होली के दिन था... आज सुबह से मूड बहुत अच्छा है, सब कुछ नया-नया सा है... मैंने अपनी भावनाओं को यूँ ही कुछ शब्दों की माला में पिरो दिया है.


    एक शाम ढली, फिर सुबह नई,
    उम्मीद नई, शुरुआत नई

    वोह चमकीला सा ख्वाब नया
    जज़्बात नए, हर आस नई

    हर आंसू गिर कर सूख गया,
    अब खुशियों की हो बात नई

    यूँ मद्धम-मद्धम चलती सी
    यह खुशियों की बारात नई

    फिर जीवन खुलकर झूम उठा,
    लम्हा-लम्हा सौगात नई

    अब रब की पनाह में है 'साहिल'
    हर मौज नई, सादात नई


    - शाहनवाज़ सिद्दीकी 'साहिल'



    *सदात = बुज़ुर्गी


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    ब्लॉग को वेबसाइट में कैसे बदलें? - ब्लॉग बुलेटिन

  • Saturday, February 18, 2012
  • by
  • Shah Nawaz
  • आजकल ईमेल तथा ब्लॉग हैकिंग की खबरे आम हैं, इसलिए अक्सर अपने ब्लॉग का बैकअप लेते रहिये. इसके लिए  ब्लॉग सेटिंग ((Settings) में जाना पड़ेगा, डेश बोर्ड से किसी ब्लॉग की सेटिंग सेक्शन में जाने के लिए सबसे पहले ब्लॉग के नाम के नीचे लिखे "सेटिंग्स" (Settings) पर क्लिक करना है।


    सेटिंग में पहुँच कर सबसे पहले "Basic" प्रष्ठ खुलता है, इसमें "ब्लॉग उपकरण" (Blog Tools) के अंतर्गत "ब्लॉग आयात करें  (Import blog) - ब्लॉग निर्यात करें (Export blog) - ब्लॉग हटाएँ" (Delete Blog) नामक 'टेब' नज़र आएँगे। हर एक ब्लॉग की सभी पोस्ट और टिप्पणियां एक XML फाइल में सुरक्षित (Save) होती है। अपने ब्लॉग XML फाइल को आप कभी भी अपने कम्प्यूटर में कॉपी (डाउनलोड) कर सकते हैं अथवा अपने कंप्यूटर से अपने ब्लॉग पर अपलोड कर सकते हैं। 

    "ब्लॉग आयात करें" (Import Blog): XML फाइल कंप्यूटर से ब्लॉग के सर्वर पर अपलोड करने के लिए तथा 
    "ब्लॉग का निर्यात करें" (Export blog): ब्लॉग की XML फाइल कंप्यूटर में Save अर्थात (डाउनलोड) करने के लिए प्रयोग किया जाता है। इन दो टूल्स के द्वारा आप कभी भी अपनी ब्लॉग पोस्ट तथा टिप्पणियों का बैकअप अपने कंप्यूटर में सहेज कर रख सकते हैं और किसी दुर्घटनावश पोस्ट डिलीट होने पर उसी फाइल से वापस अपने ब्लॉग पर अपलोड कर सकते हैं.

    अगर भविष्य में कभी भी ब्लॉग को समाप्त करना चाहेंगे तो इसे "ब्लॉग हटाएँ" (Delete Blog) पर क्लिक करके समाप्त किया जा सकता है।

    आज के दौर में अधिकतर ब्लॉगर अपने ब्लॉग को blogspot.com नाम की जगह अपने खुद के डोमेन नेम के साथ खोलना चाहते हैं. इसके लिए बहुत ज्यादा तकनिकी जानकारी की आवश्यकता नहीं है.


    स्वयं की ब्लॉग साईट: 
    अपनी स्वयं की साईट बनाने के लिए आपको एक डोमेन नेम अर्थात अपने ब्लॉग का नाम खरीदना पड़ेगा, जैसे मेरे ब्लॉग का नाम www.premras.com है, और साथ ही अगर आप अपनी ब्लॉग-पोस्ट को अपने स्पेस में रखना चाहें तो होस्टिंग पैकेज भी खरीद सकते. होस्टिंग के अंतर्गत उपलब्ध जगह (स्पेस) और डाटाबेस के द्वारा ही ब्लॉग-पोस्ट को सेव किया जाता है.  

    किसी अच्छी कंपनी से डोमेन नेम खरीदने का तकरीबन 600 रूपये का खर्च आता है. अगर आप केवल डोमेन नेम ही खरीदना चाहते हैं तो अपनी ब्लॉग पोस्ट blogger.com के द्वारा ही प्रकाशित कर सकते हैं. इसके लिए आपको डोमेन नेम खरीदने के बाद उसकी सेटिंग में कुछ बदलाव करने पड़ेंगे तथा blogger.com की सेटिंग में भी कुछ बदलाव करने पड़ेंगे.

    इसके लिए उपरोक्त विधि द्वारा सेटिंग में पहुँचने के बाद प्रकाशन (Publishing) पर क्लिक करना है, आइये प्रकाशन टेब को समझते हैं. 

    प्रकाशन (Publishing): अगर आप अपने ब्लॉग के पते के साथ blogspot.com को हटाना चाहते हैं तो डोमेन नेम खरीद कर इस टेब के द्वारा बिना होस्टिंग खरीदे अपनी वेबसाइट चला सकते हैं, इसके अतिरिक्त किसी ब्लॉग को नए पते के साथ भी जोड़ा जा सकता है। अगर डोमेन नेम खरीदना है तो यह गूगल से भी खरीदा जा सकता है अथवा अपनी पसंद की किसी और कंपनी से भी खरीद सकते हैं। इसके लिए "प्रकाशन" (Publishing) पर क्लिक करने के बाद "कस्टम डोमेन" (Custom Domain) पर क्लिक करना है, अगर डोमेन गूगल से खरीदना चाहते है तो यहाँ नाम के उपलब्ध होने की जांच की जा सकती है, किसी और कंपनी से खरीदना चाहते हैं या पहले से खरीदा हुआ है तो "उन्नत सेटिंग्स पर जाएँ" (Switch to advanced settings) पर क्लिक करना है। नए खुलने वाले प्रष्ट पर लिखे "सेटअप निर्देश" (setup instructions) पर क्लिक करके डोमेन की सेटिंग की जानकारी मिल सकती है। 

    अगर आप अपने ब्लॉग को टॉप लेवल डोमेन (top-level domain) जैसे कि www.premras.com पर होस्ट करना चाहते हैं तो जिस कंपनी से डोमेन खरीदा है वहां लोगिन करके डोमेन की सी-नेम (CNAME) सेटिंग में www में लिखकर उसके होस्ट नेम में  ghs.google.com लिखना है. 

    इसके साथ ही साथ आप चाहें तो 'ए रिकोर्ड्स' (A-records) में भी बदलाव कर सकते हैं. क्योंकि अगर ए रिकोर्ड्स नहीं डाला जाता है तो बिना www के साईट का नाम लिखने पर ब्लॉग नहीं खुलता है.  

    इसके लिए ए रिकोर्ड्स (A-records) की सेटिंग में जाकर फॉर्मेट में डोमेन नेम (जैसे कि premras.com) लिखकर 'ए' (A) सेक्शन में गूगल की 4 निम्नलिखित आई.पी. एड्रेस को भरना है.

    216.239.32.21
    216.239.34.21
    216.239.36.21
    216.239.38.21


    डोमेन सेटिंग पूरी करने के बाद "आपका डोमेन" (Your Domain) के आगे खरीदे गए डोमेन का पता भर कर प्रष्ट के नीचे लिखे तथा पर "yourdomain.com को www. yourdomain.com पर अग्रेषित करें" (Redirect yourdomain.com to www. yourdomain.com)  के आगे बने बॉक्स में क्लिक करके  "सेटिंग्स सहेजें" (Save) पर क्लिक कर दीजिये। अब आपका वही पुराना ब्लॉग आपके खरीदे गए डोमेन नेम पर खुलने लगेगा।

    अपनी साईट / ब्लॉग को ब्लॉगर प्रोफाइल से जोड़ें:
    इसके अलावा अगर आपने अपना ब्लॉग वर्डप्रेस अथवा किसी और सेटअप पर बनाया हुआ है तब भी आप उसे अपनी ब्लॉगर प्रोफाइल के साथ जोड़ सकते हैं. इसके लिए उपरोक्त सेटिंग में केवल  "आपका डोमेन" (Your Domain) के आगे अपनी साईट अथवा वर्डप्रेस ब्लॉग का पता भरना है और "सेटिंग्स सहेजें" (Save) पर क्लिक करना है. इससे आपकी साईट आपकी ब्लॉगर प्रोफाइल के साथ जुड़ जाएगी.



    पूरा पढने तथा टिप्पणी देने के लिए क्लिक करें.


    आज के दौर में जानकारी ही बचाव है - ब्लॉग बुलेटिन









    तकनिकी चर्चा, technical post, personal domain with blogger blogspot.कॉम
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    गरीबी में लाचार बचपन

  • Tuesday, January 31, 2012
  • by
  • Shah Nawaz
  • गरीबी बचपना आने ही नहीं देती है, बच्चे अपने परिवार का भार उठाने की मज़बूरी में बचपन में ही जवान हो जाते हैं और जवानी से पहले बूढ़े. हालाँकि ध्यान से देखो तो वह बच्चे भी अपने ही लगते हैं, उनमें भी अपने ही बच्चों का अक्स नज़र आता है. कुछ बच्चों के पास सबकुछ है और कुछ के पास है केवल लाचारी...



    गरीब बच्चो का
    ख्वाब होता है
    बचपन

    कब पैदा हुए
    कब जवान
    और कब चल दिये
    अनंत यात्रा पर

    याद भी नहीं
    क्या है ज़िन्दगी

    शायद हसरतो का
    नाम है,
    या फिर उम्मीदों का

    हसरतें
    कब किसकी पूरी हुई हैं?
    और
    उम्मीदें तो होती ही
    बेवफा हैं


    ऊँची इमारतें की
    क्या खता है
    आखिर ऊँचाइयों से
    कब दीखता है
    धरातल

    'कुछ' कुलबुलाता सा
    नज़र आता है
    'कीड़ों' की तरह

    या कुछ परछाइयाँ
    जो अहसास दिलाती हैं
    शिखर पर होने का

    किसी का बच्चा
    कई दिन से भूखा है
    तो हुआ करे

    ज़िद करके
    मेरे बच्चे ने तो
    पीज़ा खा लिया है

    ठिठुरती ठण्ड को कोई
    सहन ना कर पाया
    मुझे क्या,
    मेरा बच्चा तो
    नर्म बिस्तर से रूबरू है

    क्यों ना हो,
    आखिर 'हम' कमाते
    किसके लिए हैं?
    'अपने' बच्चो के लिए ही ना!

    जब गरीबों की कोई
    ज़िन्दगी ही नहीं
    तो 'बचपन' कैसा?


    Keywords: kavita, bachpan, gareeb, gareebi, garibi, bachche, life



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    थायरॉइड डिस्ऑर्डर और "ब्लॉग बुलेटिन" पर मेरी पहली ब्लॉग चर्चा

  • Sunday, January 29, 2012
  • by
  • Shah Nawaz
  • लिखावट में मेरी गरचे, निशाने जुनूँ नज़र आए.
    तो मैं समझू फ़क़त, मेहनत मेरी कामयाब हो गयी. 

    सभी मित्रों को शाहनवाज़ सिद्दीकी का 'प्रेम रस' में डूबा हुआ आदाब. यह मेरी पहली ब्लॉग्स चर्चा है, कुछ बेहतरीन ब्लॉग-पोस्ट से आप सभी को रु-बरु कराने की कोशिश करूँगा. मेरी इस पहली चर्चा की थीम स्वास्थ्य है, इसलिए सबसे पहले बात करते हैं स्वास्थ्य से जुडी कुछ जानकारियों की.

    अगर आपका वज़न अचानक तेज़ी से घट या बढ़ रहा है तो यह थायरॉइड डिस्ऑर्डर का लक्षण हो सकता है, थायरॉइड डिस्ऑर्डर के प्रमुख लक्षणों में वज़न के घटने, बढ़ने के आलावा काम में मन ना लगना, उदास रहना, हड्डियों अथवा जोड़ों में दर्द प्रमुख हैं.

    क्या होता है थायरॉइड?
    हमारी बॉडी में बहुत-से एंडोक्राइन ग्लैंड्स (अंत: स्रावी ग्रंथियां) होते हैं, जिनका काम हॉर्मोन्स बनाना होता है। इनमें से थायरॉइड भी एक है, जो कि गर्दन के बीच वाले हिस्से में होता है। थायरॉइड से दो तरह के हॉर्मोन्स निकलते हैं : T3 और T4, जो हमारी बॉडी के मेटाबॉलिज्म को रेग्युलेट करते हैं। T3 10 से 30 माइक्रोग्राम और T4 60 से 90 माइक्रोग्राम निकलता रहता है। एक तंदुरुस्त आदमी के शरीर में थायरॉइड इन दोनों हॉर्मोन्स को सही मात्रा में बनाता है, जबकि गड़बड़ी होने पर ये बढ़ या घट जाते हैं। थॉयराइड डिस्ऑर्डर के कारण महिलाओं में बांझपन और पीरियड्स के अनियमित होने की प्रॉब्लम हो जाती है। शरीर में इन दोनों के लेवल को TSH हॉर्मोन कंट्रोल करता है। THS (Thyroid Stimulating Harmone) पिट्यूटरी ग्लैंड से निकलने वाला एक हॉर्मोन है।

    क्या है थायरॉइड डिस्ऑर्डर?
    थायरॉइड ग्लैंड से निकलने वाले T3 और T4 हॉर्मोन्स का कम या ज्यादा होना थायरॉइड डिस्ऑर्डर कहलाता है।

    कैसे होता है
    - ज्यादातर मामलों में यह खानदानी होता है।
    - खाने में आयोडीन के कम या ज्यादा होने से।
    - ज्यादा चिंता करने, अव्यवस्थित खानपान और देर रात तक जागने से।
    - कुछ दवाइयों से, जैसे Amiodarone जो कि दिल के मरीजों को दी जाती है और Lithium जो कि मूड डिस्ऑर्डर यानी मानसिक रूप से परेशान मरीजों को दी जाती है। इन दवाइयों को लंबे समय तक लेने से हॉर्मोन्स का लेवल कम-ज्यादा हो जाता है, जिससे थायरॉइड डिस्ऑर्डर हो जाता है।

    कैसे पता चलता है
    किसी को थायरॉइड डिस्ऑर्डर है या नहीं, इसके लिए यह चेक किया जाता है कि बॉडी में T3, T4 और TSH लेवल नॉर्मल है या नहीं। पहले लक्षणों और फिर जांच (थायरॉइड प्रोफाइल टेस्ट) से इसका पता चलता है।

    कितने तरह का होता है :
    मोटे तौर पर थायरॉइड डिस्ऑर्डर को दो भागों में बांटा जाता है :

    1. हाइपोथायरॉइडिज्म: थायरॉइड में जब T3 और T4 हॉर्मोन लेवल कम हो जाए तो उसे हाइपोथायरॉइडिज्म कहते है। इसमें TSH बढ़ जाता है।

    2. हाइपरथायरॉइडिज्म: थायरॉइड में जब T3 और T4 हॉर्मोन लेवल अगर बढ़ जाए तो हाइपरथायरॉइडिज्म कहते है। इसमें TSH घट जाता है।

    थायरॉइड डिस्ऑर्डर में पहले TSH चेक किया जाता है और अगर उसमें कोई घट-बढ़ पाई जाती है तो फिर T3 और T4 टेस्ट किया जाता है। पहली बार थायरॉइड टेस्ट कराने के बाद दूसरी बार टेस्ट तीन से छह महीने बाद करा सकते हैं। आजकल हॉमोर्न लेवल घटने यानी हाइपोथायरॉयडिज्म के मामले ज्यादा देखे जा रहे हैं। इसमें TSH बढ़ जाता है।

    हाइपोथायरॉयडिज्म के कारण
    - आयोडीन 131 ट्रीटमेंट से। यह ट्रीटमेंट हाइपरथायरॉइडिज्म के मरीजों को दिया जाता है, जो थायरॉइड के सेल्स को मारता है। इस ट्रीटमेंट में डोज के ज्यादा या कम होने से।

    - थायरॉइड की सर्जरी से।

    - गले की रेडिएशन थेरेपी से, जो कि ब्लड और गले का कैंसर होने पर दी जाती है।

    - दवाइयों जैसे Lithium मानसिक रूप से परेशान मरीजों को दी जाती है, Anti-Thyroid Drugs थायरॉइड डिस्ऑर्डर को नॉर्मल करने के लिए, Interferon-Alfa हेपेटाइट्स और कैंसर के मरीजों को दी जाती है और Amiodarone जो कि दिल के मरीजों को दी जाती है, आदि से। ये दवाएं लंबे समय तक लेने से ही दिक्कत होती है।

    - अगर पैदाइशी रूप से थायरॉइड ग्लैंड में हॉर्मोन बनने में गड़बड़ी हो या फिर थायरॉइड ग्लैंड हो ही न।

    - अगर कोई पहले से ही थायरॉइड का ट्रीटमेंट ले रहा हो और उसे अचानक से बंद कर दे।

    - TSH की कमी से।

    - अगर किसी को हाइपोथैलमिक बीमारी हो। हाइपोथैलमस ब्रेन का ही एक पार्ट होता है, जिसमें किसी भी तरह की बीमारी जैसे ट्यूमर, रेडिएशन आदि होने से हाइपोथैलमिक बीमारी होती है, जिससे हाइपोथायरॉइडिज्म हो जाता है।


    हाइपोथायरॉइडिज्म के लक्षण

    बड़ों में
    - भूख कम लगती है, पर वजन बढ़ता जाता है।
    - दिल की धड़कन कम हो जाती है।
    - गले के आसपास सूजन हो जाती है।
    - हर काम में आलस जैसा लगने लगता है, थकावट जल्दी हो जाती है और कमजोरी आ जाती है।
    - डिप्रेशन होने लगता है।
    - पसीना कम आने लगता है।
    - स्किन ड्राई हो जाती है।
    - ठंड ज्यादा लगना (गर्मी में भी ठंड लगती है)
    - बाल ज्यादा झड़ने लगते हैं।
    - याददाश्त में कमी आ जाती है।
    - कब्ज
    - महिलाओं के पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं। कुछ मामलों में पहले पीरियड्स कम होते हैं, फिर धीरे-धीरे बंद हो जाते हैं।
    - कुछ लोगों में सुनने की शक्ति भी कम हो जाती है।

    इलाज
    पहले लीवोथॉयरोक्सिन (ये हॉर्मोन्स होते हैं) दिया जाता है, जिसकी डोज 50 माइक्रोग्राम से शुरू की जाती है और फिर TSH लेवल और जरूरत के मुताबिक इसकी डोज बढ़ाई जाती है। इसके साथ अगर मरीज की कोई ऐसी दवा चल रही हो, जोकि थायरॉइड के लेवल को घटा रही हो जैसे : Lithium, Amiodarone तो ऐसी दवाओं को रोक दिया जाता है क्योंकि ये दवाइयां हाइपोथायरॉइडिज्म करती हैं। इलाज का असर हो रहा है या नहीं, इसे दो तरह से आंक सकते हैं : पहला : ऐसे सुधार, जिन्हें मरीज खुद देख सकता है जैसे सूजन में कमी आना और दूसरा : जिसमें हॉर्मोन्स में सुधार आता है और जिनकी पहचान सिर्फ डॉक्टर ही कर सकता है।

    बच्चों में
    हाइपोथायरॉइडिज्म से पीड़ित पैदा नॉर्मल होता है लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ा होता जाता है, उसमें लक्षण दिखने लगते हैं। आमतौर पर यह आयोडीन की कमी से होता है।

    - बच्चा गूंगा-बहरा पैदा होता है।
    - बौना होता है, यानी उसकी उम्र के हिसाब से लंबाई कम होती है।
    - लंबे समय तक पीलिया रहने लगता है।
    - सामान्य बच्चों की तुलना में उसकी जीभ बड़ी होती है।
    - हड्डियों का विकास धीमा होता है।
    - नाभि फूलती जाती है।
    - आई क्यू सामान्य बच्चों की तुलना में कम होता है।

    जब कोई महिला प्रेग्नेंट होती है तो बच्चे को थायरॉइड न हो, इसके लिए मां को आयोडीन नमक वाला खाना दिया जाता है। लेकिन अगर पैदा होने के बाद बच्चे को थायरॉइड डिस्ऑर्डर हो जाता है तो उसे Iodized Oil दिया जाता है। इसमें एक एमएल में 480 मिली ग्राम आयोडीन होता है। आजकल थॉयरोक्सिन यानी Eltroxin टैब्लेट भी दी जाती हैं। 5 साल से कम के बच्चों को 8 से 12 माइक्रोग्राम से शुरू करते हैं और दिन में एक बार देते हैं। यह तब तक दी जाती है, जब तक बच्चा नॉर्मल न हो जाए।

    हाइपरथायरॉइडिज्म
    हाइपरथायरॉइडिज्म : इसकी जांच में T3, T4 बढ़ा हुआ और THS घटा हुआ रहेगा। साथ ही इसमें Thyroid Stimulating Immunoglobulin मिलता है। यह एक तरह का प्रोटीन होता है, जोकि थायरॉइड ग्लैंड में जाकर उसे ज्यादा निकालता है। इसी की वजह से यह बीमारी होती है।

    कारण
    - ग्रेव्स बीमारी से। यह आमतौर पर 20 से 50 साल तक की उम्र के लोगों में पाई जाती है और ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर से होती है। इसमें सारे लक्षण हाइपरथायरॉयडिज्म के होते हैं, जिसके ट्रीटमेंट में एंटी-थायरॉइड ड्रग सर्जरी की जाती है।
    - ज्यादा मात्रा में आयोडीन खाने से।
    - थायरॉइड हॉर्मोन ज्यादा लेने से।
    - टॉक्सिक मल्टिनॉड्युलर ग्वाइटर और टॉक्सिक एडिनोमा हो जाने से। ग्लैंड में बहुत-सी गांठें होती हैं, जिनमें बहुत तेजी से हॉर्मोन्स बनने लगते हैं।

    बड़ों में लक्षण
    - वजन कम हो जाता है।
    - दिल की धड़कन तेज होने लगती है।
    - हर काम में जल्दी रहती है।
    - चिड़चिड़ापन रहने लगता है।
    - पसीना ज्यादा आने लगता है।
    - स्किन में नमी ज्यादा रहती है।
    - दिमागी तौर पर स्मॉर्टनेस और इंटेलिजेंस बढ़ जाती है।

    थायरॉइड की सर्जरी के अलावा आयोडीन 131 और एंटी-थायरॉइड ड्रग्स जैसे Carbimazole, Methimazole और Propranolol आदि दी जाती हैं।

    बच्चों में लक्षण
    बच्चों में हाइपरथायरॉइडिज्म के मामले लगभग 5 पर्सेंट ही होते हैं, यानी उनमें हाइपरथायरॉइडिज्म के बजाय आमतौर पर हाइपोथायरॉइडिज्म ज्यादा होता है।

    - गॉइटर (घेंघा) यानी गर्दन का साइज बढ़ जाना।
    - मानसिक रूप से परेशान रहने लगेगा।
    - बच्चे का किसी भी काम में, पढ़ाई और खेलकूद में ध्यान न लगना।
    - भूख बढ़ जाना लेकिन वजन कम होना। मतलब, बच्चा खाना ज्यादा खाएगा लेकिन उसका वजन घटेगा।
    - प्रोप्टोसिस यानी आंखों का ज्यादा बाहर आ जाना।

    इसमें एंटी-थायरॉइड ड्रग जैसे Propylthioucacil और Methimazole दी जाती है। एक बार थायरॉइड लेवल नॉर्मल हो जाने पर दवाओं की डोज कम-से-कम स्तर पर ले जाते है। कितने लेवल पर ले जाना है, यह डॉक्टर तय करता है। इन्हें हॉर्मोन्स लेवल को कंट्रोल करने के लिए दिया जाता है।

    होम्योपैथ
    होम्योपैथ में भी थायरॉइड का इलाज मरीज के लक्षणों जैसे पर्सनैलिटी, बॉडी टाइप (मोटा-पतला), मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, फैमिली मेडिकल हिस्ट्री, मरीज के शरीर की संवेदनशीलता आदि के आधार पर ही किया जाता है। होम्योपैथ में TSH को नॉर्मल करने के लिए दवा दी जाती है।

    दवाएं
    लांकि लक्षणों को देखकर ही दवा और डोज दी जाती है। लेकिन कुछ दवाएं हैं, जो आमतौर पर थायरॉइड के सभी मरीजों को दी जाती है। वे हैं :

    - Calcarea Carb 30, 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।

    - Graphites 30, 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।

    - Thuja Occ 30 , 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।

    - Phosphorus 30, 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।

    - Lachesis 30, 5-5 गोली दिन में तीन बार, एक महीने तक।

    ध्यान रखें : दवा खाने से 15-20 मिनट पहले और बाद में कुछ भी न खाएं। मुंह में कोई भी तेज खुशबू वाली चीज होगी तो दवा असर नहीं करेगी।

    आयुर्वेद
    आयुर्वेद में भी ज्यादा चिंता, शोक में रहना और अव्यवस्थित खानपान को थायरॉइड डिस्ऑर्डर का मुख्य कारण माना गया है।

    लक्षणों को देखकर ही इलाज किया जाता है लेकिन सामान्य रूप से इसके लिए आरोग्यवर्द्धनी वटी (एक गोली), गुग्गुल (एक गोली), वातारि रस (एक गोली) और पुनर्नवादि मण्डूर (एक गोली) दवा दी जाती है। ये दवाएं सुबह-शाम गर्म पानी से कम-से-कम तीन महीने लेनी होती हैं। थायरॉइड डिस्ऑर्डर में घरेलू नुस्खों से ज्यादा फायदा नहीं होता।

    योग
    थायरॉइड डिस्ऑर्डर गले से जुड़ी बीमारी है, इसलिए जो भी प्राणायाम आदि गले में खिंचाव, दबाव या कंपन पैदा करे, उन्हें मददगार माना जाता है।

    थायरॉइड डिस्ऑर्डर होने पर :

    - कपालभाति क्रिया के तीन राउंड पांच मिनट तक करें।

    - उज्जयिनी प्राणायाम 15 से 20 बार दोहराएं।

    - गर्दन की सूक्ष्म क्रियाएं करें, जिसमें गर्दन को आगे-पीछे और लेफ्ट-राइट घुमाएं।

    - लेटकर सेतुबंध, सर्वांग और हलासन, उलटा लेटकर भुजंग और बैठकर उष्ट्रासन, जालंधर बंध आसन करें। सभी आसन 2 से 3 बार दोहराएं।

    नोट : सर्वांग और हलासन गर्दन, कमर दर्द, हाई बीपी और हार्ट की बीमारियों में न करें। बाकी आसन कर सकते हैं।

    थायरॉइड डिस्ऑर्डर हो ही न, इसके लिए इन सभी आसनों और प्राणायाम को रोजाना करने के साथ ही रोजाना सैर पर जाएं। रेग्युलर ऐसा करने से थायरॉइड डिस्ऑर्डर कुछ ही दिनों में कंट्रोल हो जाता है।

    क्या खाएं
    - हल्का खाना जैसे दलिया, उबली सब्जियां, दाल-रोटी आदि खाएं।
    - हरी सब्जियां और कम घी-तेल और मिर्च-मसाले वाला खाना खाएं।

    क्या न खाएं
    - बैंगन, चावल, दही, राजमा, अरबी आदि।
    - खाने की किसी भी चीज को ज्यादा ठंडा और ज्यादा गर्म न खाएं।
    - तला खाना जैसे समोसे, टिक्की आदि न खाएं।

    INMAS (Istitute of Nuclear Medicine and Allied Science)
    यह मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस का एक इंस्टिट्यूट और खासकर थायरॉइड का बड़ा हॉस्पिटल है।

    - यहां जनरल ओपीडी नहीं है। सिर्फ किसी एम. डी. डॉक्टर के रेफर पर ही यहां इलाज किया जाता है।

    - सुबह 7:30 से 11 बजे तक नंबर मिलते हैं, 8:30 से 11 बजे तक कार्ड बनाए जाते हैं और सुबह 9 से 11:30 बजे तक डॉक्टर मरीजों को देखते हैं।

    - कार्ड 10 रुपये में बनता है और इसी पर इलाज के पूरे होने तक दवाइयां लिखी जाती है, जोकि बाहर से खरीदनी होती हैं।

    फोन नंबर : 011- 2390 5327

    पता : INMAS, तीमारपुर-लखनऊ रोड, तीमारपुर, दिल्ली-110 054, दिल्ली यूनिवर्सिटी मेट्रो स्टेशन के पास।

    एक्सपर्ट्स पैनल :
    - डॉ. के. के. अग्रवाल, सीनियर कंसलटेंट, मूलचंद हॉस्पिटल
    - डॉ. ओमप्रकाश सिंह, मेडिकल ऑफिसर, ई. एस. आई. हॉस्पिटल
    - डॉ. शुचींद्र सचदेवा, सीनियर होम्योपैथ
    - एल. के. त्रिपाठी, वरिष्ठ आयुर्वेदिक चिकित्सक
    - सुरक्षित गोस्वामी, योग गुरु

    नोट : ऊपर बताई गई एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेदिक किसी भी दवा को डॉक्टर की सलाह के बिना अपने आप न लें। एलोपैथी में बताई गई सभी दवाइयों के नाम उनके जेनरिक नेम हैं। बाजार में ये अलग-अलग नामों से मिलती हैं।

    साभार: नवभारत टाइम्स





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    मैं स्वयं हाइपरथायरॉइडिज्म का शिकार रहा हूँ, खुदा का शुक्र है कि इससे निजात पा सका...

    मैंने भी अपने डॉक्टर की सलाह से इसका इलाज इनमास (INMAS) से ही कराया है. बहुत ही बेहतरीन अस्पताल है. इसलिए तभी सोचा था कि थायरॉइड डिस्ऑर्डर के ऊपर जानकारी इकठ्ठा करके सभी के सम्मुख रखूँगा.


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