भारत में मुस्लिम जनसंख्या पर मचा घमासान

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  • Shah Nawaz
  • अच्छा एक बात बताओ, मुसलमान चार-चार शादियां और इत्ते ज़्यादा बच्चे क्यों पैदा करते हैं? देश की जनसंख्या बढ़ा रखी है…



    यह बात बिल्कुल भी सही नहीं है, दरअसल राजनीतिक गिद्ध चंद वोटों के लिए झूठ का सहारा लेकर धार्मिक नफरत फैलाते हैं इमोशन भड़काने के लिए फैलाया जाता है कि मुस्लिम समाज में बहुत ज्यादा तलाक होती हैं चार-चार शादियां की जाती हैं या फिर यह कि मुस्लिम बहुत ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं। ऐसा वह लोग भी कहते हैं जो खुद पांच-छह भाई बहन हैं।

    हाल के दिनों में मुस्लिम प्रजनन दर अर्थात फर्टिलिटी रेट के बारे में जानबूझकर झूठ फैलाया गया है. ऐसा नैरेटिव सेट करने की कोशिश की गई है कि जैसे मुसलमान छह सात बच्चे पैदा करते हैं। आइए, आज इसी मुद्दे को समझने के लिए फैक्ट चेक करते हैं।

    अगर हम भारत सरकार के ऑफिशियल आंकड़ों की बात करें तो भारत में मुस्लिम प्रजनन दर 1992 में 4.4 थी जो कि 2019 में गिरकर 2.4 हो गई। वहीं हिंदू प्रजनन दर जो कि 1992 में 3.3 थी वह 2019 में गिरकर 1.9 हो गई। अगर सरकार के इस आंकड़े को देखेंगे तो हमें पता चलता है कि जैसे-जैसे समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ा है प्रजनन दर में उतनी ही तेजी से गिरावट आई। बल्कि आंकड़े बताते हैं कि जितनी तेजी से मुस्लिम समाज में गिरावट आई है उतनी तेजी से गिरावट किसी और समाज में नहीं आई है।

    अगर आसान भाषा में कहे तो इसका मतलब है कि भारत में सभी समुदायों की प्रजनन दर तकरीबन 2 के आसपास है मतलब 2 लोग यानी पति-पत्नी के द्वारा जन्म दिए गए बच्चों की संख्या 2 के आसपास है और इसका मतलब है कि फ्यूचर में जल्दी ही ऐसा वक्त आने वाला है जबकि देश की जनसंख्या बढ़ने की जगह घटने लग जाएगी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हर समुदाय में शिक्षा का स्तर बड़ा है हालांकि राजनीतिक हल्कों में इसके उलट जनसंख्या तेजी से बढ़ने का हौव्वा खड़ा किया जा रहा है। आप शिक्षा के असर का इससे अंदाजा लगाइए कि हमारे यहां शहरों में प्रजनन दर 1.6 रह गई है जबकि गांवों में यह दर 2.1 है।

    अगर राज्यों की बात करें तो यह दर बिहार में तीन है जबकि मेघालय में 2.9 है यूपी में 2.4 है झारखंड में 2.3 और मणिपुर में 2.2 है। मतलब यह हुआ कि बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की प्रजनन दर मुस्लिम समुदाय के प्रजनन दर से ज्यादा या बराबर है। 

    अगर हम सामुदायिक ऐतबार से बात करें तो हिंदू समुदाय की प्रजनन दर जो कि 1.9 है वह बौद्ध समुदाय की 1.4 जैन समुदाय की 1.6 और सिख समुदाय की 1.6 से ज्यादा है। तो फिर सोचिए क्या इन समुदाय के लोगों को हिंदू समुदाय की प्रजनन दर अपने ज्यादा होने के खिलाफ झंडा उठाना चाहिए? नहीं ना?

    आपने कभी इन समुदाय के लोगों को हिंदू समुदाय के लोगों से यह शिकायत करते हुए देखा है कि आपकी प्रजनन दर यानी फर्टिलिटी रेट हमसे ज्यादा क्यों है? ऐसा इसलिए देखने में नहीं आता है क्योंकि ऐसा करने से राजनीतिक फायदा मिलने की संभावना नहीं है। इसका मतलब यह हुआ कि मामला राजनीतिक फायदा उठाने का ज्यादा है। 

    ज्यादा जनसंख्या के बहुत सारे नुकसान हैं हालांकि इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि ज्यादा जनसंख्या हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत भी है। 90 के दशक के ग्लोबलाइजेशन के बाद हमारे देश के लोगों की परचेसिंग पावर बढ़ने से हमारी यह ताकत भी कई गुना बढ़ना शुरू हो गई थी।  यही वजह है कि हमारा देश दुनिया के अमेरिका चाइना और यूरोपियन कंट्रीज के लिए एक बड़े बाजार जैसा है और यही वह वजह है कि आज कोई भी बड़ा देश हमारी नाराजगी मोल नहीं ले सकता है, ज़रूरत मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को खड़ा करने की है, जो कि हाल के सालों में बहुत डिक्लाइन हुई है। 

    आंकड़ों से यह समझ में आता है कि जन्मदर का ताल्लुक शिक्षा के स्तर से होता है। पर बेशर्मी यह है कि सरकार इसके हल मतलब शिक्षा के स्तर को बढ़ाने पर मंथन करने की जगह इसे भी नफरत का हथियार बनाती हैं। जबकि इसकी जगह यह होना चाहिए था कि ज्यादा से ज्यादा और विश्व स्तरीय स्कूल और सरकारी कॉलेज खोले जाएं। 

    आप अपने परिवार और आसपास देखकर हमें कमेंट में बताइए कि क्या 12वीं क्लास में पास होने वाले सभी बच्चों का सरकारी कॉलेज या यूनिवर्सिटीज में एडमिशन हो जाता है। इसी एक टेस्ट से आपको पता चल जाएगा कि सरकारें मसलों को हल करने के लिए कोशिश करती हैं या फिर उसकी जगह वोट पाने के लिए जनता को इमोशनल बेवकूफ बनाती हैं। अगर ज्यादा कॉलेजेस होंगे तो एडमिशन के लिए मारामारी नहीं होगी हालांकि यह सरकार का कर्तव्य है कि हर पास होने वाले बच्चे का हायर स्टडी के लिए एडमिशन होना सुनिश्चित किया जाए। क्योंकि पढ़ेगा इंडिया तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया।

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    AI आपके पैसे के भविष्य को बदल रहा है

  • by
  • Shah Nawaz
  • सोचिए अगर आपका बैंक अकाउंट खुद जान जाए कि आपको लोन कब चाहिए। यह आपका इन्वेस्टमेंट ऐप बिना पूछे आपके लिए बेस्ट और खरीद दे। साइंस फिक्शन लग रहा है ना?



    लेकिन दोस्तों ये एआई और मशीन लर्निंग की दुनिया में अब रियलिटी बन चुका है। आज हम बात करेंगे कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस हमारे फाइनेंस सेक्टर को बदल रहा है और आने वाले सालों में आपके पैसों पर इसका क्या असर पड़ेगा।


    AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। मशीनों को इंसानों की तरह सोचने की ताकत देना और मशीन लर्निंग मतलब डाटा से सीखकर स्मार्ट डिसीजन लेना। अब सोचिए फाइनेंस इंडस्ट्री में तो डाटा की भरमवार है। हर ट्रांजैक्शन, हर पेमेंट, हर इन्वेस्टमेंट सब डाटा ही डाटा। एआई इसी डाटा को पढ़ता है, एनालाइज करता है और समझता है कि कहां कब और कैसे बेहतर फाइनशियल डिसीजन लिए जा सकते हैं। 


    पहला बड़ा इंपैक्ट स्मार्ट इन्वेस्टिंग आज एआई बेस रोबो एडवाइज़र जैसे go kera और zerodha आपकी रिस्क प्रोफाइल और गोल्स देखकर ऑटोमेटिक पोर्टफोलियो बना देते हैं। अब आपको एक्सपर्ट ढूंढने की जरूरत नहीं है क्योंकि आपका ऐप ही आपका फाइनेंसियल एक्सपर्ट बन चुका है। 


    दूसरा बड़ा फायदा फ्रॉड डिटेक्शन। एआई हर ट्रांजैक्शन में रियल टाइम में एनालाइज करता है और जैसे ही कोई सस्िशियस एक्टिविटी दिखती है जैसे किसी दूसरे शहर से लॉग इन या अनयूजुअल स्पेंडिंग तुरंत अलर्ट भेज देता है। इससे बैंकों के लिए साइबर सिक्योरिटी पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है। 


    तीसरा बड़ा बदलाव लोन अप्रूवल्स। पहले लोन अप्रूव होने में कई कई दिन या हफ्ते लगते थे। अब चंद मिनटों में भी अप्रूवल मिल सकता है। एआई आपके स्पेंडिंग हैबिट्स, इनकम और रीपेमेंट हिस्ट्री को एनालाइज करता है और मशीन लर्निंग मॉडल्स प्रेडिक्ट करते हैं कि बरोबर लोन चुका पाएगा या नहीं।


    यह प्रोसेस अब फास्टर और फेरियर दोनों बन गया है। एi अब मार्केट ट्रेंड्स भी प्रेडिक्ट कर रहा है। बिग फाइनेंस फर्म्स जैसे जेबी मॉ्गन गोल्डम्स और भारत में zerod टेक AI पावर्ड मॉडल का इस्तेमाल मार्केट टेक्नोलॉजी और रिस्क को समझने के लिए कर रही हैं। मतलब अब स्टॉक मार्केट डिसीजन सिर्फ गट फीलिंग पर नहीं बल्कि डाटा ड्रिवन इनसाइट्स पर लिया जा रहा है। 


    और हां आपने कभी बैंक या इन्वेस्टमेंट ऐप में चैट बॉक्स से बात की है? 

    हेलो हाउ कैन आई हेल्प यू? 

    हां वही यह भी एआई है। अब 24x7 सपोर्ट इंस्टेंट आंसर और पर्सनलाइज एक्सपीरियंस सब एआई की देन है। 

    लेकिन दोस्तों हर टेक्नोलॉजी के दो पहलू होते हैं। एआई के साथ भी कुछ चैलेंजेस हैं। जैसे डेटा प्राइवेसी, एल्गोरिदम बायस और सबसे बड़ा ह्यूमन जॉब्स पर इसका असर। अगर एआई गलत डाटा से सीखे तो गलत फैसले भी ले सकता है। इसलिए एथिकल एआई और डाटा प्रोटेक्शन लॉस बहुत जरूरी है। एआई और मशीन लर्निंग अब सिर्फ टेक कंपनी का फ्यूचर नहीं है। बल्कि हर आम इंसान की फाइनेंसियल लाइफ का हिस्सा बन चुके हैं। 


    जो लोग एआई को समझ लेंगे वो सिर्फ टेक्नोलॉजी नहीं अपनी वेल्थ को भी कंट्रोल करेंगे। 


    अगर आपको यह ब्लॉग इनफेटिव लगे तो इसे अपने दोस्तों और जानने वालों के साथ शेयर करिये और कमेंट्स में बताइये कि आप कौन सा फाइनेंस टूल यूज करते हैं 


    How AI is Changing the Future of Money | AI in Finance, Stock Market Explained in Hindi

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    फिलिस्तीन को फिर से गांधीजी जैसे नेता की ज़रूरत है

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  • Shah Nawaz
  • फिलिस्तीन को फिर से यासर अराफात या फिर गांधी जी जैसे एक मज़बूत और संयम रखने वाले लीडर की ज़रूरत है जो क़ौम को एकजुट करने, आर्थिक और ताकत के तौर पर मज़बूत बनाने और संयम बरतते हुए सही वक़्त का इंतज़ार करने की पॉलिसी के साथ आगे बढ़ सके। 


    गाँधी जी ने 1857 की क्रांति के नतीजों और मौजूदा हालात को देखते हुए भाँप लिया था कि अंग्रेजों के साथ फिलहाल सीधी लड़ाई लड़कर नहीं जीता जा सकता है। क्योंकि अगर उन्हें हरा भी दिया तो आधी से ज़्यादा दुनिया पर राज करने वाले अंग्रेज़ दूसरे देशों से अपनी फौज बुलाकर वापिस कब्ज़ा कर लेंगे और पहले से ज़्यादा खून-खराबा करेंगे। इसलिए बेहतर नीति थी कि क़ौम को इकट्ठा और मज़बूत किया जाए और साथ ही सही वक्त का इंतज़ार किया जाए। 


    अगर फिलिस्तीन इश्यू पर देखें तो जब इंग्लैंड जैसे देशों ने 1948 में यूएन का मुखौटा लगाकर यहूदियों को दूसरे देशों से लाकर वहाँ बसना शुरू किया और इज़राईल नामक देश को बसाया वो तब से एक ही पॉलिसी पर चल रहा है। वो फिलिस्तीनियों को भड़काता है और जब यह भड़ककर उसपर हमला करते हैं तो वो उसको आधार बनाकर फिलिस्तीन में तबाही मचाता है और उनकी ज़मीनों पर कब्ज़ा कर लेता है 1948 में जहाँ फिलिस्तीन 55% से भी ज़्यादा जगह पर था आज मात्र 12% पर रह गया है।


    इन देशों ने इज़राईल को पूरी और लंबी प्लानिंग से बसाया था और दुनिया के इन सभी शक्तिशाली देशों का उसे सपोर्ट हासिल है। मतलब यह कि अगर इज़राईल के हारने का कोई इमकान बनता भी हो तो भी हराना आसान नहीं होगा, क्योंकि यह सारे देश उसके साथ खड़े हैं, जबकि फिलिस्तीन के समर्थन में कोई खड़ा नहीं होगा। 


    फिलहाल मेरी नज़र में तो फिलिस्तीन को इस वक़्त ऐसी लीडरशिप की ज़रूरत है जो इज़राईल की इस चाल की काट ढूंढकर फिलिस्तीनियों और उनकी जमीन को ना सिर्फ बचा सके बल्कि उन्हें तरक्की की ओर आगे बढ़ा सकें।


    फिलिस्तीनियों को जो करना है खुद ही करना पड़ेगा, कड़वी है पर यही सच्चाई है। सबसे पहली ज़रूरत फिलिस्तीन को एक राष्ट्र के तौर पर मज़बूत बनाना पड़ेगा। 


    जापान का उदाहरण सबके सामने है कि अमेरिका द्वारा एटम बम के हमले में 2 शहर तबाह होने और अमेरिकी कब्जे के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। बल्कि उन्होंने 30 साल की एजुकेशन पॉलिसी बनाकर ख़ुद को टेक्नोलॉजी में इतना मज़बूत बनाया कि 1970 आते-आते अमेरिका को खुद बा खुद कब्ज़ा छोड़ना पड़ा...

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    AI का साथ नौकरियों का भविष्य

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  • Shah Nawaz
  • अरे यार, हर तरफ AI की ही चर्चा है, पता नहीं अब हमारी जॉब का क्या होगा?




    देखिये AI का ज़माना वाकई अब Officially शुरू हो चुका है! 

    और अब सवाल ये है — क्या आपकी job safe है… या AI आपका काम भी कर लेगा?


    तो चलिए आज हम बात करते हैं उस चीज़ के बारे में जो दुनिया को बदल रही है यानी Artificial Intelligence.


    जानने की कोशिश करते हैं कि कौन सी jobs खतरे में हैं, आपको कौन सी skills बचा सकती हैं और कैसे आप AI के साथ survive नही बल्कि thrive कर सकते हैं!


    AI अब सिर्फ Science फिक्शन नहीं है, आज ChatGPT से लेकर Midjourney तक — ये tools आपकी writing, designing, coding… सब कुछ कर सकते हैं!


    सोचिए — जिस काम में पहले एक designer को 5 घंटे लगते थे, अब Midjourney 5 सेकंड में कर देता है!

    AI सिर्फ Automate नहीं करता है, ये Create भी कर रहा है.... और यही डर की असली वजह है।

    अरे भाई भाई, खुलकर बताओ यार... कौन-कौन सी जॉब जाने वाली हैं? 

    World Economic Forum के अनुसार, अगले कुछ सालों में लाखों Jobs Automate हो सकती हैं।जैसे कि Data Entry Clerks, Basic level वाले Graphic Designers, Customer Support Agents, Content Writers, Basic level वाले Video Editors, मतलब जो बेसिक काम हैं वो AI से हो जाया करेंगे, पर प्रोफेशनल जॉब्स जैसे कि प्रोफेशनल Graphic Designers और प्रोफेशनल Video Editors को डरने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि Creativity के लिए इंसानी Imotions, सोच और दिमाग की ज़रूरत होती है।


    अगर आपका काम Repeatable है, Predictable है — तो AI उसे बहुत जल्दी सीख लेगा। जैसे एक Junior Content Writer जो सिर्फ Blogs rewrite करता है — ChatGPT वो काम मिनटों में कर देता है।


    इस बात को अच्छी तरह से समझ लीजिये कि AI जॉब डिस्ट्रॉयर नहीं है — ये जॉब ट्रांसफॉर्मर है!


    जिन लोगों ने Technology को अपनाया, वो आज सबसे आगे हैं।


    AI डरने की चीज़ नहीं है, use करने की चीज़  है जैसे कि Writer AI से Ideas ले सकता है, लेकिन Emotion सिर्फ इंसान दे सकता है।


    ऐसे ही Designer AI से Drafts बनवा सकता है, पर Final Touch उसकी Creativity होगी।और Teacher AI से Personalized Notes बनवा सकता है, पर Students को Inspire सिर्फ वो खुद ही कर सकता है। 


    जैसा कि मैंने पहले भी कहा कि इंसानी Emotions, सोच और दिमाग इंसान को मिला कुदरत का तोहफा हैं जो कि AI के पास कभी नहीं आ पाएंगे.


    Survival का formula एकदम simple है: Upgrade Yourself.... Before You Get Replacedमतलब खुद को अपग्रेड करें, इससे पहले कि आपको बदल दिया जाए! 


    AI Tools सीखिए, 

    अपने अंदर Human Skills Build कीजिए, जैसे कि — हमदर्दी, Creativity और Leadership कोई भी नई तकनीक सामने आए तो उससे भागिए नहीं बल्कि जिज्ञासु बनिए, नई तकनीक के साथ Experiment करियेमतलब AI को competitor नहीं बल्कि अपना साथी बनाना है


    अब आप चाहें या नहीं चाहें पर AI का ज़माना आ गया है — और जो समझ गया,है, वक़्त के साथ खुद को ढ़ाल लिया है, उसके साथ कदमताल करने को तैयार है वही आगे बढ़ेगा!


    तो बताइए — क्या आप ready हैं AI के साथ काम करने के लिए…

    या अभी भी डर रहे हैं कि AI आपकी Job ले लेगा?”    


    अपने विचार Comment में बताइए


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    अब बिना बैंक अकाउंट के भी होगा UPI पेमेंट! बच्चों के लिए आया बड़ा डिजिटल अपडेट

  • by
  • Shah Nawaz

  • क्या आपने कभी सोचा है —

    अगर किसी बच्चे के पास बैंक अकाउंट न हो, तो क्या वो भी UPI से पेमेंट कर सकता है?

    अब तक जवाब था — “नहीं।”
    लेकिन अब डिजिटल इंडिया की रफ्तार इतनी तेज़ हो चुकी है कि बच्चे भी ऑनलाइन पेमेंट की दुनिया में कदम रख सकेंगे!


    जी हां, अब बिना बैंक अकाउंट के भी बच्चे UPI से पेमेंट कर पाएंगे —
    वो भी बिल्कुल सुरक्षित और लिमिटेड तरीके से।

    भारत में UPI ने पेमेंट सिस्टम को पूरी तरह बदल दिया है।
    आज सब्ज़ी वाले से लेकर शॉपिंग मॉल तक — हर जगह “QR स्कैन करो और पेमेंट कर दो” का चलन है।

    लेकिन बच्चों के लिए यह सुविधा अब तक सीमित थी, क्योंकि
    UPI इस्तेमाल करने के लिए बैंक अकाउंट ज़रूरी होता था।

    अब नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने एक नया नियम लाकर
    इस मुश्किल को आसान बना दिया है।


    🧠 क्या है नया बदलाव? (The New Rule Explained)

    NPCI ने घोषणा की है कि अब माइनर यानी 10 साल या उससे ज़्यादा उम्र के बच्चे
    भी UPI ऐप्स का इस्तेमाल कर सकेंगे।

    हालांकि, यह पेमेंट बैंक अकाउंट से नहीं, बल्कि प्रीपेड वॉलेट (Prepaid Wallet) से किया जाएगा।

    यानि बच्चे के पास बैंक अकाउंट नहीं होगा,
    लेकिन एक वॉलेट अकाउंट होगा जो UPI ID से जुड़ा रहेगा।


    🏦 यह सिस्टम कैसे काम करेगा? (Step-by-Step Process)

    1. पैरेंट्स या गार्डियन अपने नाम से एक प्रीपेड वॉलेट खोलेंगे।

    2. उस वॉलेट में पैसे ऐड किए जा सकेंगे — जैसे ₹500, ₹1000 या जितना चाहें।

    3. बच्चे के लिए एक अलग UPI ID बनाई जाएगी, जो इसी वॉलेट से लिंक होगी।

    4. बच्चा अपने फोन से QR कोड स्कैन करके, या मोबाइल नंबर डालकर पेमेंट कर सकेगा।

    5. हर पेमेंट का नोटिफिकेशन पैरेंट्स के मोबाइल पर जाएगा, ताकि पूरा कंट्रोल उन्हीं के हाथ में रहे।


    🔒 सुरक्षा और सीमाएं (Safety & Limitations)

    NPCI ने इस सुविधा को पूरी तरह सुरक्षित और लिमिटेड यूज़ के लिए डिज़ाइन किया है —

    • बच्चे एक तय सीमा तक ही ट्रांजेक्शन कर सकेंगे (जैसे ₹2,000 प्रतिदिन या ₹10,000 प्रति माह)।

    • हर ट्रांजेक्शन OTP या PIN से वेरिफाई होगा।

    • पैरेंट्स ऐप से बच्चे का खर्चा ट्रैक और कंट्रोल कर सकेंगे।

    • कोई भी संदिग्ध ट्रांजेक्शन तुरंत ब्लॉक किया जा सकेगा।

    इससे बच्चों को डिजिटल पेमेंट का अनुभव भी मिलेगा और उनकी सुरक्षा भी बनी रहेगी।


    🎓 बच्चों के लिए फायदे (Benefits for Kids)

    1. फाइनेंशियल लिटरेसी बढ़ेगी – बच्चे सीखेंगे कि पैसों का सही इस्तेमाल कैसे करना है।

    2. कैशलेस सुविधा – अब स्कूल कैंटीन, टिफिन या स्टेशनरी के पेमेंट आसानी से UPI से किए जा सकेंगे।

    3. सेफ्टी – नकद पैसे ले जाने का डर खत्म।

    4. रियल-टाइम मॉनिटरिंग – पैरेंट्स हर खर्चे की जानकारी तुरंत देख सकेंगे।


    👨‍👩‍👧 पैरेंट्स के लिए फायदे (Benefits for Parents)

    • बच्चों की खर्च करने की आदतों पर नियंत्रण रहेगा।

    • जरूरत पड़ने पर वॉलेट में तुरंत पैसे ऐड किए जा सकते हैं।

    • कोई गलत ट्रांजेक्शन होने पर तुरंत रोकथाम संभव है।

    • डिजिटल पेमेंट का सुरक्षित और शिक्षाप्रद तरीका


    🌐 डिजिटल इंडिया का नया कदम (Broader Impact)

    यह पहल न सिर्फ बच्चों के लिए, बल्कि देश के डिजिटल फाइनेंस सिस्टम के लिए भी
    एक बड़ा कदम है।

    भारत पहले ही UPI के जरिए दुनिया को दिखा चुका है कि
    कैसे डिजिटल पेमेंट को हर हाथ तक पहुंचाया जा सकता है।

    अब जब बच्चे भी इस यात्रा का हिस्सा बनेंगे,
    तो अगली पीढ़ी डिजिटल इंडिया की असली शक्ति को आगे बढ़ाएगी।


    🗣️ निष्कर्ष (Conclusion)

    तो अगली बार जब आपका बच्चा कहे —
    “मम्मी, टिफिन का पेमेंट मैं UPI से कर दूँ?” 😄

    तो हैरान मत होइए,
    क्योंकि अब UPI बच्चों के लिए भी खुल चुका है!

    सुरक्षित, सीमित और शिक्षाप्रद डिजिटल पेमेंट सिस्टम —
    अब बच्चों के हाथों में भी डिजिटल इंडिया का भविष्य है। 🇮🇳


    अगर आपको यह जानकारी उपयोगी लगी,

    तो इसे शेयर ज़रूर करें ताकि हर पेरेंट तक यह खबर पहुँचे।

    और कमेंट में बताइए —
    क्या आप चाहते हैं कि आपका बच्चा भी UPI पेमेंट करना सीखे?

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    यूरोप का सबसे पुराना शहर Plovdiv Bulgaria 🇧🇬

  • by
  • Shah Nawaz


  • आज हम बात कर रहे हैं यूरोप के सबसे पुराने और सबसे खूबसूरत शहरों में से एक—Plovdiv, Bulgaria की। मैंने दुनिया के बहुत से शहर देखें हैं, पर सच बताऊँ—Plovdiv ने मेरी ट्रैवल लिस्ट में एक अलग ही जगह बना ली है।


    सबसे पहले आपको बताता हूँ कि यहाँ आने से पहले आपको किन किन बातों का ख्याल रखना है। यहाँ आने और रहने में एक औसत खर्च करने के हिसाब से कितना खर्च आ जाएगा। 


    प्लॉवदीव बुलगारिया का शहर है और बुल्गारिया 2024 से शेनगन जोन (Schengen Zone) में आता है, इसलिए यहाँ घूमने के लिए आपके पास शेनगन वीज़ा होना ज़रूरी है। आप इंडिया से VFS ग्लोबल के लिए डायरेक्ट बुल्गारिया के लिए भी वीज़ा अप्लाई कर सकते हैं या फिर आप ग्रीस, रोमानिया या फिर इटली जैसी किसी और शेनेगन कंट्री से घूमते हुए भी यहाँ आ सकते हैं। इसके अलावा तुर्किए के शहर इस्तांबुल से भी गहन बस या डायर एरोप्लेन के ज़रिए यहाँ पहुँच सकते हैं। 


    घूमने के प्लान से एक महीना पहले ही वीसा के लिए अप्लाई कर दें तो बेहतर है, बुल्गारिया से शेनेगन वीज़ा में थोड़ा वक्त लग सकता है, मुझे C  टाइप वीज़ा मिलने में 20 वर्किंग डे लगे थे, जो कि शोर्ट टर्म वीज़ा होती है और सभी शेनगन काउंटी में वैलिड होती है। वीसा अप्लाई करने में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसके ऊपर मैं अलग से एक वीडियो बना दूँगा, जिससे कि आपका सफ़र आसान रहे।


    मैंने दिल्ली से सोफिया के लिए फ्लाइट का टिकट इंडिगो से लिया था जो कि सामान्यत: एक तरफ़ का 20 हज़ार के आसपास का पड़ता है। पर इन दिनों वापसी का टिकट मुझे 37 हज़ार का पड़ा जो कि नार्मल प्राइस से डबल का है, इसलिए एडवांस में बुकिंग करवा लेना सही तरीका है।


    यहाँ आने से पहले ही E-Sim बुक कर लेना चाहिए। जिससे कि यहाँ पहुंचकर टेक्सी लेना आसान रहे। यहाँ आने से पहले ही Booking.com जैसी किसी वेबसाइट से होटल और कैब बुक कर लेना चाहिए। सोफिया भी एक बेहद खूबसूरत शहर है, आप सोफिया घूमने के बाद भी Plovdiv आ सकते हैं या फिर वापसी में सोफिया एक्सप्लोर कर सकते हैं।


    सोफिया से Plovdiv के लिए टैक्सी के अलावा बस या फिर ट्रेन से भी सफ़र किया जा सकता हैं। पर उसके लिए एयरपोर्ट से बस स्टैंड या फिर ट्रेन स्टेशन जाना पड़ेगा। मुझे टैक्सी से यहाँ आना ज़्यादा बेहतर लगा, क्योंकि मेरे साथ फ़ैमिली भी थी और हमारा कुल खर्च भी 60 euro आया।


    यहाँ हमने रुकने के लिए होटल की जगह फ्लैट बुक किया था, क्योंकि हमें किचन चाहिए थी, इसमें सेल्फ चेकइन होती है। उन्होंने ईमेल पर एक लिंक भेजा था, जिसे खोलने पर इंस्ट्रक्शन, वाईफाई का पासवर्ड और चाबियों के बॉक्स का पासवर्ड था। 


    पर हमारे फ़ोन में इंटरनेट नहीं चल पा रहा था, इसलिए वो लिंक ही नहीं खुल रहा था। ड्राइवर को हॉटस्पॉट का मतलब भी नहीं पता था और उसका फ़ोन लोकल लैंग्वेज में था, इसलिए मैंने किसी तरह हॉटपॉट तो ऑन कर लिया पर पासवर्ड नहीं ढूँढ पाया। किसी तरह मैनेज करके चेक इन किया, पर अपार्टमेंट देखकर दिल खुश हो गया।


    Plovdiv यूरोप के सबसे पुराने शहरों में से एक है, जिसे आप “Cultural Heart of Bulgaria” भी कह सकते हैं। Plovdiv का मशहूर TSAR यानी ज़ार सेमोन गार्डन, हमारे होटल से मात्र 250 मीटर की दूरी पर ही स्थित है, इसलिए हम पैदल ही पहुँच जाएँगे।


    बुल्गारिया की कुल जनसंख्या तक़रीबन 65 लाख है, जो कि हमारे किसी छोटे शहर से भी कम है, जबकि Plovdiv की जनसंख्या सिर्फ़ साढ़े तीन लाख है। अगर आप यूरोप में भीड़ से दूर, शांत, खूबसूरत और हिस्ट्री से भरा कोई शहर ढूंढ रहे हैं, तो Plovdiv आपके लिए एक परफेक्ट डेस्टिनेशन है।


    Plovdiv दुनिया के उन शहरों में से एक है जो Rome से भी पुराना है, लगभग 8000 साल पुराना इतिहास, थ्रेसियन सभ्यता, रोमन साम्राज्य, ओटोमन काल और फिर मॉडर्न बुल्गारिया — Plovdiv हर दौर को अपने अंदर समेटे खड़ा है।

    Tsar यानी ज़ार सिमोन गार्डन – शहर के दिल में बसी एक शांत और खूबसूरत जगह है 

    अगर आप Plovdiv घूमने आए हैं और थोड़ी देर शहर की भीड़-भाड़ से दूर शांत वातावरण में समय बिताना चाहते हैं, तो Tsar यानी ज़ार सिमोन गार्डन आपके लिए परफेक्ट जगह है। 1892 में बनाए गए इस खूबसूरत गार्डन को Plovdiv के सबसे पुराने और आकर्षक पार्कों में गिना जाता है। इसे अक्सर “शहर का ग्रीन हार्ट” भी कहा जाता है।

    इतिहास की खुशबू से भरा हुआ गार्डन

    ज़ार सिमोन गार्डन को पहली बार 19वीं शताब्दी के अंत में प्रसिद्ध स्विस लैंडस्केप आर्किटेक्ट Lucien Chevallaz ने डिजाइन किया था। उस समय Plovdiv में पहली इंटरनेशनल फेयर आयोजित हुई थी और इसी के लिए शहर को एक शानदार सार्वजनिक बाग की जरूरत थी। तब से लेकर आज तक गार्डन अपनी ऐतिहासिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए मशहूर है।

    मुख्य आकर्षण – Singing Fountains

    ज़ार सिमोन गार्डन का सबसे बड़ा आकर्षण है Singing Fountains। गर्मियों की शामों में यहां पानी, रोशनी और संगीत का बेहतरीन शो देखने को मिलता है।

    • शो आमतौर पर फ़्राइडे और सैटरडे की रात, लगभग 9 बजे के बाद शुरू होता है (सीज़न के अनुसार समय थोड़ा बदल सकता है)।

    • रंग-बिरंगी रोशनी और बैकग्राउंड म्यूज़िक मिलकर ऐसा माहौल बना देते हैं कि हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।

    यह जगह खासकर फैमिली, कपल्स और फोटोग्राफर्स के लिए बेहद आकर्षक है।

    शांति, प्रकृति और खूबसूरती

    गार्डन के अंदर लंबी-लंबी वॉकिंग पाथ, हरे-भरे पेड़ और सजी-धजी फ्लावर बेड किसी भी विज़िटर को आराम महसूस कराते हैं।

    • बेंचों पर बैठकर आप घंटों बिता सकते हैं।

    • छोटे-छोटे तालाब, ऐतिहासिक मूर्तियाँ और पुरानी शैली की लाइट्स गार्डन को एक रोमांटिक टच देती हैं।

    • बच्चों के लिए खेलने की जगह और खुले लॉन परिवारों के लिए इसे और भी खास बनाते हैं।

    लोकेशन – बिल्कुल सिटी सेंटर में

    ज़ार सिमोन गार्डन, Plovdiv के सेंट्रल एरिया में बना है—यानी यहाँ पहुँचना बहुत आसान है।
    यह Central Railway Station के पास और Main Pedestrian Street के बिल्कुल बगल में आता है। इसलिए घूमते-घूमते यहां आना बहुत सुविधाजनक है, या फिर आप मेरी तरह अपना सफ़र यहाँ से भी शुरू कर सकते हैं।

    आप यहाँ

    • मॉर्निंग वॉक या ईवनिंग स्टॉल, फाउंटेन शो का आनंद लेने, फोटोग्राफी, बच्चों के साथ पिकनिक, शांति में बैठकर शहर की हवा महसूस करने के लिए और 

    • प्लोवदिव की लोकल लाइफ़ को करीब से देखने के लिए आ सकते हैं

    साल के किसी भी मौसम में गार्डन सुंदर लगता है, अभी तो ठंड शुरू हो चुकी है, पतझड़ का मौसम है, पर मई से सितंबर के महीनों में इसकी हरियाली और फाउंटेन शो इसे और भी खास बना देते हैं।

    अगर आप Plovdiv में हैं, तो Tsar Simeon Garden ज़रूर देखें—यह उन जगहों में से है जो आपको शहर की असली खूबसूरती और शांत माहौल में डुबो देती हैं।


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    Aadhaar में बड़े बदलाव - जानिए नए नियम

  • by
  • Shah Nawaz
  • तो दोस्तों आज हम बात करने वाले हैं Aadhaar Card के उन नए नियमों के बारे में जो UIDAI 1 नवम्बर से लागू करने जा रहा हैं — और जो हर भारतीय के लिए जानना बहुत ज़रूरी है।




    अगर आपके पास Aadhaar Card है — तो ये वीडियो आपके लिए बहुत काम की है

    दोस्तों, Aadhaar Card आज सिर्फ़ एक पहचान पत्र नहीं है —
    ये बैंकिंग, सिम कार्ड, सरकारी योजनाओं, और कई तरह की ऑनलाइन वेरिफिकेशन के लिए सबसे ज़रूरी डॉक्युमेंट बन चुका है।

    इसलिए जब भी इसमें कोई नया नियम या अपडेट आता है, वो सीधे करोड़ों लोगों को प्रभावित करता है।

    तो आइए जानते हैं Aadhaar Card के बड़े बदलाव 👇

    1. अब आधार कार्ड ऑनलाइन ही अपडेट हो जाया करेगा, आपको आधार कार्ड में नाम, पता, जन्मतिथि या मोबाइल नंबर जैसी जानकारी अपडेट करने के लिए आधार सेवा केंद्र जाने की जरूरत नहीं होगी. UIDAI ने एक नया डिजिटल सिस्टम तैयार किया है जिसके तहत आप ये सब कुछ ऑनलाइन ही घर बैठे कर सकेंगे. आपके द्वारा दी गई जानकारी सरकारी डेटाबेस जैसे PAN कार्ड, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस या राशन कार्ड से अपने आप वेरिफाई हो जाएगी. इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और सुरक्षा दोनों बढ़ेंगी.

    2. आधार-पैन लिंकिंग अब जरूरी हो गया है.
    UIDAI ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हर पैन कार्ड धारक को 31 दिसंबर 2025 तक अपने पैन को आधार से लिंक करना अनिवार्य है. अगर आपने यह काम समय पर नहीं किया, तो 1 जनवरी 2026 से आपका पैन इनएक्टिव हो जाएगा. इसका मतलब यह है कि आप न तो आयकर रिटर्न फाइल कर पाएंगे और न ही किसी वित्तीय लेनदेन में पैन का उपयोग कर सकेंगे. सरकार ने यह कदम फर्जीवाड़े और टैक्स चोरी जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए उठाया है.

    3. KYC प्रोसेस को भी अब आसान कर दिया गया है
    UIDAI ने KYC प्रक्रिया को भी आसान और पूरी तरह डिजिटल बना दिया है. अब बैंक, म्यूचुअल फंड या किसी अन्य वित्तीय संस्था में KYC कराने के लिए आपको कागज़ी दस्तावेजों की जरूरत नहीं होगी.

    अब आप तीन तरीकों से KYC पूरा कर सकेंगे- Aadhaar OTP वेरिफिकेशन से, वीडियो KYC के जरिए, फेस-टू-फेस वेरिफिकेशन के माध्यम से. यह पूरी प्रक्रिया अब पेपरलेस और समय बचाने वाली होगी. इससे आम उपभोक्ताओं के साथ-साथ बैंकिंग सेक्टर को भी सुविधा मिलेगी. 

    UIDAI के ये नए नियम डिजिटल इंडिया मिशन को और आगे बढ़ाएंगे. अब आधार अपडेट, KYC और दस्तावेज वेरिफिकेशन पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित होंगे. जो लोग समय पर अपने डॉक्यूमेंट्स अपडेट नहीं करेंगे या आधार-पैन लिंकिंग नहीं करेंगे, उन्हें भविष्य में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है.

    1 नवंबर से लागू होने वाले ये बदलाव न केवल प्रक्रियाओं को सरल बनाएंगे, बल्कि डिजिटल पहचान प्रणाली को और भी मजबूत करेंगे जिससे नागरिकों को पारदर्शी और आधुनिक सुविधा मिलेगी

    इसके अलावा UIDAI ने घोषणा की है कि

    • हर 10 साल में Aadhaar biometric अनिवार्य रूप से अपडेट करना होगा।इसका मक़सद है — आपकी पहचान हमेशा accurate और fraud-free रहे।
    • 2025 से UIDAI कई सरकारी और निजी सेवाओं में Face Authentication System शुरू कर रहा है। यानी अब सिर्फ़ OTP या fingerprint नहीं — Face Scan से भी Aadhaar verify किया जा सकेगा।
    • UIDAI एक official Aadhaar Wallet App लाने की तैयारी में है — जहां आप अपने Aadhaar को offline QR code या NFC से इस्तेमाल कर पाएंगे, बिना इंटरनेट के।
    • अब Aadhaar में Address Update करना आसान होगा — आपको अब सिर्फ़ self-declaration + online verification की जरूरत होगी, किसी document upload की नहीं।

    अगर हम बात बाल आधार की करें तो बच्चों के Aadhaar में अब automatic photo & biometric reminder system होगा,

    ताकि हर 5 साल में update time पर आपको notification मिल सके।

    ये सारे बदलाव इसीलिए लाए जा रहे हैं ताकि Aadhaar system सुरक्षिततेज़, और भरोसेमंद बने। 

    इससे identity theft कम होगी और fraud cases पर रोक लगेगी।

    और हाँ — ये सभी अपडेट्स UIDAI की official announcements पर आधारित हैं,


    आपके पास यह जानकारी होना ज़रूरी है।

    👉 अपना Mobile number और Email Aadhaar से लिंक्ड रखें।

    👉 हर कुछ साल में Photo और Address update करते रहें।

    👉 और जैसे ही नया UIDAI app लॉन्च हो, उसे ज़रूर download करें —

    ताकि आपकी पहचान 100% safe और future-ready रहे।


    दोस्तों, अगर आपको ये जानकारी useful लगी,  अपने दोस्तों और परिवार के साथ share करें

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    छात्रों पर मार्क्स लाने का प्रेशर और परिणाम

  • by
  • Shah Nawaz
  • बहुत सारे स्टूडेंट अच्छे मार्क्स से पास हो रहे हैं, खूब दिल लगाकर पढ़ाई करना और इम्तेहान में अच्छे मार्क्स से पास होना ज़रूरी तो है, पर जिस तरह से अच्छी सरकारी शिक्षण संस्थाओं में कमी आयी है, या यह कहा जाए कि जिस तरह से माध्यम और गरीब वर्ग के बच्चे अब शिक्षा का महत्व समझकर पढ़ाई कर रहे हैं, उसके मुक़ाबले सरकारी शिक्षण सास्थाएँ बहुत कम बनाई गई हैं। जिसकी वजह से उच्च शिक्षण संस्थानों में एडमिशन लेने के लिए स्टूडेंट्स के ऊपर ज़्यादा से ज़्यादा मार्क्स लाना मजबूरी बन गया है।

    यही वजह ही कि मुझे ज़्यादा मार्क्स लाने वाले स्टूडेंट्स के साथ ख़ुशी से ज़्यादा सहानुभूति होने लगी है।
    स्टूडेंट्स पढ़ाई में मेहनत सीखने की जगह ज़्यादा मार्क्स लाने के लिये करते हैं, चैप्टर्स को समझने और रिसर्च करने की जगह रट्टा मारा जाता है, जिससे कि बस फ़ौरी तौर पर अच्छे से अच्छे मार्क्स लाकर उन्हें उच्च शिक्षा के लिए एडमिशन मिल सके।
    यह कंपीटिशन बच्चों के अंदर ऐसा प्रेशर भरता है कि वो अंदर से कमज़ोर होते चले जाते हैं। अक्सर बच्चे इस प्रेशर को सहन नहीं कर पाते हैं और बीच में ही जीवन से हार जाते हैं और बाक़ी स्टूडेंट्स उस मानसिक कमज़ोरी को ज़िंदगी भर झेलते रहते हैं।
    माध्यम और गरीब वर्ग के पैरेंट्स के लिए तो अपने बच्चों को कमज़ोर आर्थिक स्थिति से बाहर निकलने का यही रास्ता बचता है, क्योंकि वो अपने बच्चों का एडमिशन प्राइवेट संस्थाओं मे करा ही नहीं सकते हैं।
    हमारे देश में सरकारें अच्छे सरकारी शिक्षण संस्थान इसलिए नहीं बना रही हैं कि अगर माध्यम और गरीब वर्ग के बच्चे भी पढ़ लिख गये तो फिर अमीर वर्ग के बच्चों का क्या होगा? क्योंकि फिर उच्च स्तरीय नौकरियों पर बड़ी तादाद में पास हुए गरीब तबके के बच्चे अपना दावा पेश करेंगे।
    हर साल 20 लाख से ज़्यादा बच्चे NEET की परीक्षा में बैठते हैं और मात्र 50 हज़ार के आसपास ही MBBS की सीटें सरकारी संस्थानों में हैं। यही हाल JEE जैसी दूसरी परीक्षाओं का भी है।
    पर सब राजनैतिक पार्टियाँ मस्त हैं, क्योंकि उन्हें वोट धार्मिक नफ़रत की राजनीति और इस राजनीति का विरोध करने से मिल ही रहे हैं। वोट डालने वालों को अपने बच्चों के मुस्तक़बिल की कोई परवाह ही नहीं है तो किसी और को भी क्यों ही हो?

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    सही नीयत, अच्छी सोच, सही योजना और अधिकार के बावजूद लागू न करना

  • by
  • Shah Nawaz
  • कई बार हमारा मक़सद भी अच्छा होता है, हमारी सोच भी सही होती है, हमारी प्लानिंग भी परफ़ेक्ट होती है, हमारे पास करने के अधिकार भी पूरे होते हैं, फिर भी हम वो नहीं कर पाते जिसे करना ज़रूरी होता है… 


    क्योंकि अगर हम अपनी सोच के हिसाब से ही सबकुछ करने लग जाएँगे तो उनकी ज़िंदगी के कोई मायने नहीं रह जाएँगे जो कि हमारे फ़ैसले से प्रभावित हो रहे होंगे। भले ही हमारी कोशिश उन्हीं की ज़िंदगी सुधारने की ही क्यों ना हो… 


    इस बात को एक उदाहरण से समझने कि कोशिश करते हैं, अपनी ज़िंदगी में हम अगर घर के बेटे के तौर पर देखते हैं कि हमारी मां और हमारी पत्नी हमारी सोच के ख़िलाफ़ चल रही होती है। हमें लगता है कि माँ इस तरह चले और पत्नी उस तरह चले तो घर का माहौल ख़ुशगवार हो जाएगा। आपसी खींचतान ख़त्म हो जाएगी। 


    यहाँ हमारा मक़सद भी सही होता है, पर अगर हम अपनी सोच उनके ऊपर ज़बरदस्ती थोपते हैं, तो उनकी ज़िंदगी के मायने ख़त्म हो जाते हैं। उन दोनों का अपनी ज़िंदगी को अपने हिसाब से जीने का हक़ ख़त्म हो जाता है। हमारे ज़बरदस्ती कंट्रोल करने से झगड़े या फिर खींचतान तो ख़त्म हो सकती है, पर ज़िंदगी में जो लुत्फ़ आना चाहिए वो खो जाता है। क्योंकि इसके लिए उन दोनों को अपनी पर्सनेलिटी को ख़त्म करना पड़ता है। इंसान को फ़ितरत ही ऊपर वाले ने ऐसी बनाई है।



    हालाँकि ऐसे में आप कुछ और भी कर सकते हैं, जैसे कि किचकिच से तंग आकर संयुक्त परिवार से विद्रोह करके अलग रह सकते हैं, पर इसमें भी आप एक ही पक्ष को खुश रख पाते हैं और दूसरे के साथ अन्याय करते हैं। और यह हमारा फ़र्ज़ है कि हम उनके साथ न्याय करें, जिनका हमारे ऊपर हक़ है!

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    ला इलाहा और इल्लल्लाह का तात्पर्य

  • by
  • Shah Nawaz
  • कलमा की शुरुआत 'ला इलाहा' से होती है, मतलब कि नहीं है कोई उपास्य (जिसकी उपासना की जा सकती हो), जो कि किसी नास्तिक का भी कलमा होता है। फिर दूसरा पार्ट है 'इल्लल्लाह', जिसका मतलब है सिवाए अल्लाह/रब/ईश्वर/गॉड के... यह मेसेज दुनिया के हर दौर में, अलग-अलग भाषाओं, अलग-अलग देश/क्षेत्र में आए ईश दूतों ने इंसानों को दिया है। 


    इस कलमा/कथन का तात्पर्य ही यह है कि किसी नास्तिक या फिर आस्तिक के पुत्र/पुत्री तब तक धार्मिक नहीं है जब तक कि उसे अपने रब यानी creater में आस्था पैदा नहीं होती है। मतलब मुस्लिम के बच्चे मुस्लिम, हिंदू के बच्चे हिंदू, सिख के बच्चे सिख, ईसाई के बच्चे ईसाई, यहूदी के बच्चे यहूदी हरगिज़ नहीं हो सकते हैं जब तक कि उनके अंदर कलमें के पहले पार्ट के बाद वाली उत्सुकता पैदा नहीं हो और वो दूसरे पार्ट की खोजकर करके उसके ऊपर आस्था ना ले आए!


    मतलब उसे रिसर्च करनी चाहिए कि क्या उसका कोई रब है या नहीं और जब दिल इस बात पर विश्वास कर ले कि हां कोई उसका रब/creater है तब उसे अपने रब को खोजना चाहिए और जब उसकी खोज पूरी हो जाए तो अपनी जिंदगी उसकी मर्ज़ी से गुज़ारनी चाहिए।


    विश्वास कीजिए कि जिसने भी इस प्रोसेस को अपनाया उसकी मौत इससे पहले आ ही नहीं सकती है जब तक कि उसके रब की हकीकत साफ़ साफ़ उसके सामने ज़ाहिर नहीं हो जाए, क्योंकि फिर ज़िम्मेदारी आपकी नहीं आपके रब की है!


    पर यह प्रोसेस कोई धर्म का दुकानदार हमें नहीं बताएगा, क्योंकि फिर आपसी दुश्मनियां और धर्म की लड़ाइयां खत्म हो जाएंगी, मतलब उनकी दुकानदारी खत्म हो जाएगी। जिसके ज़रिए वो अपना पेट भरते हैं या फिर सत्ता चलाते हैं। वैसे सत्ता सिर्फ देश/राज्य की ही नहीं होती है, बल्कि घर की, मौहल्ले की, एरिया की, किसी ग्रुप की या फिर कौम की भी होती है।

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