मुहम्मद (स.) ने मालूम किया कि सबसे गरीब शख्स कौन है, तो लोगों ने कहा कि जिसके पास धन-दौलत नहीं है।
तब आप (स.) ने फ़रमाया कि सबसे गरीब वोह है जो ज़िन्दगी में लाखों-करोंड़ों अच्छे कामों से अपनी झोली भर कर ले कर गया, मगर लोगों के हक़ अता नहीं किए। इंसाफ के दिन उसके सारे अच्छे काम उनकी झोली में चले जाएँगे जिनका हक़ मारा होगा और इस तरह वोह खाली हाथ रह जाएगा।
जैसे कि किसी पर तोहमत लगाई होगी, किसी का दिल दुखाया होगा, रास्ते में कूड़ा फैलाया, लाल बत्ती तोड़ी और ग्रीन लाइट वालों की जगह खुद निकल गया, प्यासे को पानी नहीं पिलाया, किसी से उधार लिया और लौटाया नहीं, अपनी कमाई में से पडौसियों, रिश्तेदारों, यतीमों तथा गरीबों का हक़ उनतक नहीं पहुँचाया, ख़ुद खाना खा लिया और पडौसी भूखा रहा, गरीब / यतीम को दिखा-दिखा (प्रदर्शित) कर वह खाना खाया जो उनको मयस्सर नहीं है, इत्यादि...
जब सवाब (पुन्य) में से कुछ नही बचेगा, मगर लोगों के हक़ बचे होंगे तो उनके गुनाह इसके हिस्से में लिख दिए जाएँगे। (व्याख्या)

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