अगर आज तुम्हें लग रहा है कि सब कुछ खत्म हो गया है…
अगर बार-बार हारने के बाद दिल कह रहा है — “अब बस…”
तो ज़रा तो ज़रा ठहरिए!
सच बताऊँ?
हार वही महसूस करता है जो सपने देखता है।
जिसने कभी कोशिश ही नहीं की, उसे हार का दर्द भी नहीं होता।
एक छोटा सा किस्सा सुनाता हूँ…
एक लड़का था।
साधारण घर से,
बड़े सपने लेकर।
पहला एग्ज़ाम — फेल।
दूसरा इंटरव्यू — रिजेक्ट।
तीसरी कोशिश — मज़ाक बना दी गई।
एक दिन उसने खुद से कहा —
“शायद मैं ही गलत हूँ।”
लेकिन उसी रात
उसकी माँ ने सिर्फ़ इतना कहा —
“बेटा, हार तब होती है
जब कोशिश बंद हो जाए।”
अगले दिन से उसने दोबारा शुरुआत की।
धीरे-धीरे, चुपचाप।
आज वही लड़का, वहीं खड़ा है
जहाँ पहुंचने का कभी उसे हक़ भी नहीं दिया गया था।
समझ रहे हो बात?
लड़का बदला नहीं था, उसकी ज़िद बदली थी।
नाकामी ने उसे रोका नहीं, उसने नाकामी को सीढ़ी बना लिया।
जो गिरता है,
उठने की क़ीमत भी वही समझता है।
लोग कहते हैं — “मैं फेल हो गया।”
नहीं… तुम फेल नहीं हुए हो।
बल्कि इस नाकामी से तुम सीखे हो।
और जो सीखकर आगे बढ़ने का जज़्बा दिखाता है वो फेल नहीं होता है, क्योंकि वो अपनी गलतियों से सीखकर फिर से खड़ा होना सीखता चला जाता है।
नाकामी कोई आख़िरी मंज़िल नहीं,
ये तो बस एक मोड़ है
जहाँ ज़िंदगी पूछती है — “रुकना है या आगे बढ़ना है?”
याद रखना…
हर बड़ी कामयाबी से पहले एक ऐसा दौर आता ही है जहाँ इंसान अंदर से टूट जाता है।
लेकिन यही पल तय करता है — कि तुम कहानी बनोगे या सिर्फ़ एक अफ़सोस।
जिस दर्द से तुम आज गुज़र रहे हो ना, कल वही तुम्हारी ताक़त बनेगा।
आज जो लोग तुम्हारी खामोशी नहीं समझते, कल वही लोग तुम्हारी आवाज़ सुनने के लिए तरसेंगे।
बस एक चीज़ मत करना— हार मत मानना।
अगर हालात तुम्हें दबा रहे हैं, तो समझ लो तुम ऊपर उठने वाले हो।
हीरे पर भी सबसे ज़्यादा दबाव पड़ता है, तभी वो चमकता है।
याद रखना…
ज़िंदगी ने तुम्हें गिराया है, लेकिन तोड़ा नहीं है।
ज़िंदगी तुम्हें तोड़ ही नहीं सकती है, हम टूटते हमेशा ख़ुद से ही हैं।
अगर आज भी तुम सांस ले रहे हो,
तो समझ लो — तुम्हारा रब तुम्हारा साथ देना चाहता है।
उठो!
हार वही मानता है, जो कोशिश छोड़ देता है।
तुम्हें तो अभी बहुत आगे जाना है।


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