दोस्तों, अगर आपका अपना परिवार आपकी मुहब्बत की वजह से आपकी जान लेने का फ़ैसला कर ले…
तो उसे क्या कहंगे?
इज़्ज़त?
सम्मान?
या फिर
सीधी-सीधी इंसानियत की हत्या?
आज हम एक ऐसी ही सच्ची घटना पर डिस्कशन करने जा रहे हैं, जो उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले में हुई, और जिसने पूरी इंसानियत का सर शर्म से झुका दिया है।
लेकिन जब लड़की और लड़के ने अपना फ़ैसला बदलने से इनकार कर दिया, तो मामला बहस से आगे बढ़ गया।
पुलिस जांच के मुताबिक, लड़की के परिवार के कुछ लोगों ने दोनों को बहाने से एक जगह बुलाया। वहाँ उन्हें बंधक बनाया गया, उनके साथ मारपीट की गई, और फिर बेरहमी से दोनों का क़त्ल कर दिया गया।
क़त्ल के बाद, इस जघन्य अपराध को छुपाने के लिए उनके शवों को गाँव के बाहर एक सुनसान जगह पर दफ़ना दिया गया।
कुछ दिनों तक दोनों के बारे में कोई खबर नहीं थी।लेकिन जब मामला सामने आया, तो पुलिस ने जांच की, शव बरामद हुए, और इस तरह सच्चाई सबके सामने आ गई।
पुलिस के अनुसार, यह हत्या लड़की के सगे भाइयों द्वारा की गई, और इसे ऑनर किलिंग यानी सम्मान के नाम पर हत्या के रूप में दर्ज किया गया।
किस क़ानून में लिखा है कि प्यार करना अपराध है?किस धर्म में लिखा है कि इंसान की जान ले ली जाए? किस समाज में यह तय किया गया कि परिवार ही ख़ुदा बन जाएगा?
ऐसे में दोनों में से कोई एक अगर अपना धर्म बदलता है तो यह तो उल्टा अपनी आस्था का मज़ाक उड़ाना होता है, क्योंकि धर्म सिर्फ और सिर्फ आस्था बदलने पर ही बदला जा सकता है। डर, लालच या प्रेम की वजह से धर्म बदलने का नाटक तो हो सकता है, पर आस्था हरगिज़ नहीं बदल सकती है।
पर अगर दोनों ने फैसला कर ही लिया तो फिर ऐसे में उनके परिवार वाले भी रोककर क्या हासिल कर लेंगे? अगर आप उनके फैसले से सहमत नहीं हैं तो आने वाली कम्प्लीकेशन पर उनके साथ डिस्कशन करिये, हम बस इतना ही कर सकते हैं। इसके बाद हमारा काम खत्म।
इज़्ज़त?
सम्मान?
या फिर
सीधी-सीधी इंसानियत की हत्या?
आज हम एक ऐसी ही सच्ची घटना पर डिस्कशन करने जा रहे हैं, जो उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद ज़िले में हुई, और जिसने पूरी इंसानियत का सर शर्म से झुका दिया है।
यह मामला है मुरादाबाद ज़िले के उमरी सब्ज़ीपुर गाँव का।
यहाँ रहने वाली एक लड़की जो कि हिंदू समुदाय से थी और एक लड़का जो कि मुस्लिम समाज से आता था, बहुत वक्त से एक-दूसरे को जानते थे। पसंद करते थे। दोनों बालिग थे। दोनों समझदार थे।
और दोनों ने तय किया था कि वे शादी करके एक साथ ज़िंदगी बिताएँगे। लेकिन उनकी यह मुहब्बत कुछ लोगों को नागवार गुज़री।
लड़की का परिवार, ख़ासकर उसके भाई, इस रिश्ते के सख़्त खिलाफ़ थे। उन्होंने कई बार लड़की पर दबाव बनाया, धमकियाँ दीं, और कहा गया कि “यह रिश्ता हमारे समाज की इज़्ज़त के ख़िलाफ़ है।”
लड़की का परिवार, ख़ासकर उसके भाई, इस रिश्ते के सख़्त खिलाफ़ थे। उन्होंने कई बार लड़की पर दबाव बनाया, धमकियाँ दीं, और कहा गया कि “यह रिश्ता हमारे समाज की इज़्ज़त के ख़िलाफ़ है।”
लेकिन जब लड़की और लड़के ने अपना फ़ैसला बदलने से इनकार कर दिया, तो मामला बहस से आगे बढ़ गया।
पुलिस जांच के मुताबिक, लड़की के परिवार के कुछ लोगों ने दोनों को बहाने से एक जगह बुलाया। वहाँ उन्हें बंधक बनाया गया, उनके साथ मारपीट की गई, और फिर बेरहमी से दोनों का क़त्ल कर दिया गया।
क़त्ल के बाद, इस जघन्य अपराध को छुपाने के लिए उनके शवों को गाँव के बाहर एक सुनसान जगह पर दफ़ना दिया गया।
कुछ दिनों तक दोनों के बारे में कोई खबर नहीं थी।लेकिन जब मामला सामने आया, तो पुलिस ने जांच की, शव बरामद हुए, और इस तरह सच्चाई सबके सामने आ गई।
पुलिस के अनुसार, यह हत्या लड़की के सगे भाइयों द्वारा की गई, और इसे ऑनर किलिंग यानी सम्मान के नाम पर हत्या के रूप में दर्ज किया गया।
दोस्तों, हमें यहाँ रुककर सोचना चाहिए।
क्या वाकई यह “सम्मान” था? बताइए ज़रा…
किस क़ानून में लिखा है कि प्यार करना अपराध है?किस धर्म में लिखा है कि इंसान की जान ले ली जाए? किस समाज में यह तय किया गया कि परिवार ही ख़ुदा बन जाएगा?
यह कोई सम्मान नहीं था। यह था — डर, नफ़रत और समाज से मिलने वाले तानों से उपजा हुआ ग़ुस्सा। जिसे मुहब्बत की कुर्बानी देकर शांत किया गया।
और सवाल यह है कि क्या अब वो सम्मान बच गया होगा? सवाल यह है कि हमारा क़ानून क्या कहता है?
भारत का संविधान साफ़ कहता है — कि हर बालिग नागरिक अपनी ज़िंदगी का फ़ैसला खुद ले सकता है। धर्म, जाति या समाज के नाम पर किसी की हत्या सीधा मर्डर है। ऑनर किलिंग कोई अलग परंपरा नहीं, बल्कि एक जघन्य अपराध है।
दोस्तों, सबसे डरावनी बात यह नहीं है कि हत्या हुई।उससे भी डरावनी बात यह है कि आज भी बहुत से लोग कहते हैं कि — “गलत तो किया… लेकिन समाज में तो ऐसा ही होता है।”
याद रखिए, जब हम “ऐसा ही होता है” कह देते हैं,
उसी दिन हम अगली हत्या को जायज़ बना देते हैं।
याद रखिए, जब हम “ऐसा ही होता है” कह देते हैं,
उसी दिन हम अगली हत्या को जायज़ बना देते हैं।
असल इज़्ज़त इसमें नहीं है कि लोग क्या कहेंगे।दुनिया के लोग तो किसी भी हालत में नहीं छोड़ते हैं, पर अगर कोई सख्त ज़रूरत पड़ जाए तो कोई काम भी नहीं आता है
असल इज़्ज़त इसमें है कि आपका बच्चा ज़िंदा है,
महफ़ूज़ है और ख़ुश है। असल इज़्ज़त इसमें है कि
आप इंसान बने रहें, क़ातिल नहीं।
असल इज़्ज़त इसमें है कि आपका बच्चा ज़िंदा है,
महफ़ूज़ है और ख़ुश है। असल इज़्ज़त इसमें है कि
आप इंसान बने रहें, क़ातिल नहीं।
किसी इंसान के क़त्ल की इजाज़त हमें कोई धर्म कभी नहीं दे सकता है।
आपका बच्चा आपकी इज़्ज़त नहीं है, आपकी ज़िम्मेदारी है।
हालाँकि मैं यह हमेशा से कहता आया हूँ कि अलग-अलग धर्म के मानने वाले लड़के और लड़की में से दोनों या कोई एक भी अगर धार्मिक है तो उन्हें शादी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि ऐसे मामलों में शादी के बाद बहुत ज़्यादा कॉम्प्लीकेशन्स होती हैं, बल्कि प्रोब्लम्स इतनी ज़्यादा बढ़ जाती हैं कि साथ में रहना भी एक अज़ाब बन जाता है।
ऐसे में दोनों में से कोई एक अगर अपना धर्म बदलता है तो यह तो उल्टा अपनी आस्था का मज़ाक उड़ाना होता है, क्योंकि धर्म सिर्फ और सिर्फ आस्था बदलने पर ही बदला जा सकता है। डर, लालच या प्रेम की वजह से धर्म बदलने का नाटक तो हो सकता है, पर आस्था हरगिज़ नहीं बदल सकती है।
पर अगर दोनों ने फैसला कर ही लिया तो फिर ऐसे में उनके परिवार वाले भी रोककर क्या हासिल कर लेंगे? अगर आप उनके फैसले से सहमत नहीं हैं तो आने वाली कम्प्लीकेशन पर उनके साथ डिस्कशन करिये, हम बस इतना ही कर सकते हैं। इसके बाद हमारा काम खत्म।
अगर वो फिर भी नहीं माने तो उन्हें उनके हाल पर छोड़ दीजिये।
उनकी ख़ुशी के लिए दुआ कीजिये, क्योंकि वो आपकी संतान हैं, बहन या भाई हैं। उन्हें अपनी ज़िन्दगी जीने का उतना ही हक़ है, जितना आपको या दुनिया के किसी भी इंसान को है!
उनकी ख़ुशी के लिए दुआ कीजिये, क्योंकि वो आपकी संतान हैं, बहन या भाई हैं। उन्हें अपनी ज़िन्दगी जीने का उतना ही हक़ है, जितना आपको या दुनिया के किसी भी इंसान को है!
जैसा कि दिल्ली में अंकित सक्सेना की हत्या से लगा था।
अगर आज भी हमने यूँ बेगुनाहों को क़त्ल होते देखा और चुप रहे, तो कल हमारी चुप्पी किसी और की कब्र खोदेगी।
अगर आप इस सोच के खिलाफ़ हैं, तो आवाज़ उठाइये, चुप्पी मत अपनाइए।
शुक्रिया!



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