भारत में मुस्लिम जनसंख्या पर मचा घमासान

Posted on
  • by
  • Shah Nawaz
  • in
  • Labels: ,
  • अच्छा एक बात बताओ, मुसलमान चार-चार शादियां और इत्ते ज़्यादा बच्चे क्यों पैदा करते हैं? देश की जनसंख्या बढ़ा रखी है…



    यह बात बिल्कुल भी सही नहीं है, दरअसल राजनीतिक गिद्ध चंद वोटों के लिए झूठ का सहारा लेकर धार्मिक नफरत फैलाते हैं इमोशन भड़काने के लिए फैलाया जाता है कि मुस्लिम समाज में बहुत ज्यादा तलाक होती हैं चार-चार शादियां की जाती हैं या फिर यह कि मुस्लिम बहुत ज्यादा बच्चे पैदा करते हैं। ऐसा वह लोग भी कहते हैं जो खुद पांच-छह भाई बहन हैं।

    हाल के दिनों में मुस्लिम प्रजनन दर अर्थात फर्टिलिटी रेट के बारे में जानबूझकर झूठ फैलाया गया है. ऐसा नैरेटिव सेट करने की कोशिश की गई है कि जैसे मुसलमान छह सात बच्चे पैदा करते हैं। आइए, आज इसी मुद्दे को समझने के लिए फैक्ट चेक करते हैं।

    अगर हम भारत सरकार के ऑफिशियल आंकड़ों की बात करें तो भारत में मुस्लिम प्रजनन दर 1992 में 4.4 थी जो कि 2019 में गिरकर 2.4 हो गई। वहीं हिंदू प्रजनन दर जो कि 1992 में 3.3 थी वह 2019 में गिरकर 1.9 हो गई। अगर सरकार के इस आंकड़े को देखेंगे तो हमें पता चलता है कि जैसे-जैसे समाज में शिक्षा का स्तर बढ़ा है प्रजनन दर में उतनी ही तेजी से गिरावट आई। बल्कि आंकड़े बताते हैं कि जितनी तेजी से मुस्लिम समाज में गिरावट आई है उतनी तेजी से गिरावट किसी और समाज में नहीं आई है।

    अगर आसान भाषा में कहे तो इसका मतलब है कि भारत में सभी समुदायों की प्रजनन दर तकरीबन 2 के आसपास है मतलब 2 लोग यानी पति-पत्नी के द्वारा जन्म दिए गए बच्चों की संख्या 2 के आसपास है और इसका मतलब है कि फ्यूचर में जल्दी ही ऐसा वक्त आने वाला है जबकि देश की जनसंख्या बढ़ने की जगह घटने लग जाएगी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हर समुदाय में शिक्षा का स्तर बड़ा है हालांकि राजनीतिक हल्कों में इसके उलट जनसंख्या तेजी से बढ़ने का हौव्वा खड़ा किया जा रहा है। आप शिक्षा के असर का इससे अंदाजा लगाइए कि हमारे यहां शहरों में प्रजनन दर 1.6 रह गई है जबकि गांवों में यह दर 2.1 है।

    अगर राज्यों की बात करें तो यह दर बिहार में तीन है जबकि मेघालय में 2.9 है यूपी में 2.4 है झारखंड में 2.3 और मणिपुर में 2.2 है। मतलब यह हुआ कि बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों की प्रजनन दर मुस्लिम समुदाय के प्रजनन दर से ज्यादा या बराबर है। 

    अगर हम सामुदायिक ऐतबार से बात करें तो हिंदू समुदाय की प्रजनन दर जो कि 1.9 है वह बौद्ध समुदाय की 1.4 जैन समुदाय की 1.6 और सिख समुदाय की 1.6 से ज्यादा है। तो फिर सोचिए क्या इन समुदाय के लोगों को हिंदू समुदाय की प्रजनन दर अपने ज्यादा होने के खिलाफ झंडा उठाना चाहिए? नहीं ना?

    आपने कभी इन समुदाय के लोगों को हिंदू समुदाय के लोगों से यह शिकायत करते हुए देखा है कि आपकी प्रजनन दर यानी फर्टिलिटी रेट हमसे ज्यादा क्यों है? ऐसा इसलिए देखने में नहीं आता है क्योंकि ऐसा करने से राजनीतिक फायदा मिलने की संभावना नहीं है। इसका मतलब यह हुआ कि मामला राजनीतिक फायदा उठाने का ज्यादा है। 

    ज्यादा जनसंख्या के बहुत सारे नुकसान हैं हालांकि इसका एक दूसरा पहलू यह भी है कि ज्यादा जनसंख्या हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत भी है। 90 के दशक के ग्लोबलाइजेशन के बाद हमारे देश के लोगों की परचेसिंग पावर बढ़ने से हमारी यह ताकत भी कई गुना बढ़ना शुरू हो गई थी।  यही वजह है कि हमारा देश दुनिया के अमेरिका चाइना और यूरोपियन कंट्रीज के लिए एक बड़े बाजार जैसा है और यही वह वजह है कि आज कोई भी बड़ा देश हमारी नाराजगी मोल नहीं ले सकता है, ज़रूरत मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री को खड़ा करने की है, जो कि हाल के सालों में बहुत डिक्लाइन हुई है। 

    आंकड़ों से यह समझ में आता है कि जन्मदर का ताल्लुक शिक्षा के स्तर से होता है। पर बेशर्मी यह है कि सरकार इसके हल मतलब शिक्षा के स्तर को बढ़ाने पर मंथन करने की जगह इसे भी नफरत का हथियार बनाती हैं। जबकि इसकी जगह यह होना चाहिए था कि ज्यादा से ज्यादा और विश्व स्तरीय स्कूल और सरकारी कॉलेज खोले जाएं। 

    आप अपने परिवार और आसपास देखकर हमें कमेंट में बताइए कि क्या 12वीं क्लास में पास होने वाले सभी बच्चों का सरकारी कॉलेज या यूनिवर्सिटीज में एडमिशन हो जाता है। इसी एक टेस्ट से आपको पता चल जाएगा कि सरकारें मसलों को हल करने के लिए कोशिश करती हैं या फिर उसकी जगह वोट पाने के लिए जनता को इमोशनल बेवकूफ बनाती हैं। अगर ज्यादा कॉलेजेस होंगे तो एडमिशन के लिए मारामारी नहीं होगी हालांकि यह सरकार का कर्तव्य है कि हर पास होने वाले बच्चे का हायर स्टडी के लिए एडमिशन होना सुनिश्चित किया जाए। क्योंकि पढ़ेगा इंडिया तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया।



    Fact or Fear? Unpacking the Debate on Muslim Population Growth in India | Aapka Shah | Shahnawaz Siddiqui Is India really witnessing a sharp rise in its Muslim population — or is it just misinformation spreading online? 🇮🇳 In this article, we dive deep into the facts, figures, and fears surrounding the ongoing debate over India’s changing religious demographics. 📊 What We Cover: The data behind India’s population growth trends Muslim vs Hindu fertility rates over the decades Myths vs facts about demographic changes Why the topic sparks so much political and social tension Expert opinions and census insights 🔍 Our Goal: To separate fact from fear and bring clarity to one of India’s most debated issues — without bias, emotion, or agenda. 💬 Join the Conversation: Do you think the debate around population growth in India is based on facts or fear? Comment your thoughts below ⬇️ 📌 Don’t forget to: 🔁 Share with friends who follow social & demographic issues #IndiaPopulation #MuslimPopulation #IndiaDemographics #ReligiousTrends #CensusIndia #PopulationGrowth #FertilityRate #SocialIssuesIndia #DataAnalysis #FactCheckIndia

    0 comments:

    Post a Comment

     
    Copyright (c) 2010. प्रेमरस All Rights Reserved.