ग़ज़ल: सच अगर आया ज़ुबाँ पर फासला हो जाएगा

Posted on
  • by
  • Shah Nawaz
  • in
  • Labels: , ,
  • यूँ ना देखो दुनियाभर में तब्सिरा हो जाएगा 
    फ़क़्त बस बैठे-बिठाए मसअला हो जाएगा 

    होंट हिलते ही नहीं हैं आप हो जब सामने
    आप ही कोशिश करो तो हौसला हो जाएगा 

    रेत पर बच्चे की मेहनत लहरों से टकरा गई
    पर 'घरौंदा' टुटा तो वो ग़मज़दा हो जाएगा 

    दिल अभी महफूज़ है महफ़िल के कारोबार से
    आप गर चाहेंगे तो यह मुब्तिला हो जाएगा 

    आ करूँ में आज तुझसे दिलरुबा यह फैसला
    और भी कुछ ना हुआ तो तजरुबा हो जाएगा 

    ग़ैर के तो ऐब हमने रात-दिन देखा किये
    अपने देखेंगे तो यह दिल आईना हो जाएगा 

    चापलूसी पर टिकें हैं 'साहिल' रिश्ते आज के
    सच अगर आया ज़ुबाँ पर फासला हो जाएगा 

    - शाहनवाज़ 'साहिल'

    16 comments:

    1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 04-02-2016 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2242 में दिया जाएगा
      धन्यवाद

      ReplyDelete
    2. चर्चामंच के माध्यम से सबसे अच्छी और शानदार पोस्ट तक पहुंच ही गया।

      वाह....

      ReplyDelete
      Replies
      1. इस हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया रोहित जी!

        Delete
    3. Replies
      1. शुक्रिया अमृता जी...

        Delete
    4. वाह ! बहुत खूब !

      ReplyDelete
      Replies
      1. शुक्रिया साधना जी

        Delete
    5. shaandaar ghazal! Aapka takhallus pasand aaya:)

      ReplyDelete
      Replies
      1. हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया अमित जी...

        Delete
    6. Replies
      1. बहुत-बहुत शुक्रिया प्रवीण भाई जी..

        Delete
    7. बहुत सुन्दर है रचना आपकी और उसपर आपका ये अंदाज -
      चापलूसी पर टिकें हैं 'साहिल' रिश्ते आज के
      सच अगर आया ज़ुबाँ पर फासला हो जाएगा
      जबाब नहीं है ..............

      ReplyDelete
      Replies
      1. हौसला अफ़ज़ाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया v k jain जी..

        Delete
    8. बहुत ही सुन्दर सच लिखा आपने
      सलाम आपकी लेखनी को

      ReplyDelete
      Replies
      1. बहुत-बहुत शुक्रिया कंचन जी

        Delete

     
    Copyright (c) 2010. प्रेमरस All Rights Reserved.