पकड़ ले आइना हाथों में बस उनको दिखाता चल

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  • Shah Nawaz
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  • हज़ारों साज़िशें कम हैं सियासत की अदावत की
    हर इक चेहरे के ऊपर से नकाबों को हटाता चल

    कभी सच को हरा पाई हैं क्या शैतान की चालें?
    पकड़ ले आइना हाथों में बस उनको दिखाता चल

    करो कुछ काम ऐसे भी अदावत 'इश्क़' हो जाएं
    रहे इंसानियत ज़िंदा, मुहब्बत को निभाता चल

    भले कैसा समाँ हो यह, बदल के रहने वाला है
    कभी मायूस मत होना, यूँही खुशियाँ लुटाता चल

    - शाहनवाज़ 'साहिल' 

    11 comments:

    1. आप की यह पोस्ट कल के बुधवारीय चर्चा मंच पर-

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      1. शुक्रिया रविकर जी!

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    2. आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 23 फरवरी 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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    3. गलती हो गई क्षमा याचना सहित आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" बुधवार 24फरवरी 2016 को लिंक की जाएगी............... http://halchalwith5links.blogspot.in पर आप भी आइएगा ....धन्यवाद!

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      1. मेरी पोस्ट को मान देने का बहुत-बहुत शुक्रिया यशोदा जी....

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    4. राजनीति की बिरयानी साजिशों के मसालों से ही पकती हैं। ये मसालें जलन ही पैदा करते है।

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      1. बिलकुल सही अवलोकन किया आपने मनीषा जी....

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      1. शुक्रिया अमित जी...

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    6. प्यारी ग़ज़ल !
      मतला भूल गए क्या साहिल मियां ? ये रहा ....

      सभी सदबुद्धि पा जाएँ यही ढफली बजाता चल !
      है माँ के पाक क़दमों में पड़ी ज़न्नत बताता चल !

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      1. शुक्रिया सतीश भाई, बस यह ऐसे ही लिखी थी :)

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