क्या टीम अरविन्द को मौका मिलना चाहिए?

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  • Shah Nawaz
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  • मैं अन्ना जी और अरविन्द केजरीवाल दोनों का मुद्दों पर आधारित प्रशंसक हूँ, (बल्कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध जागरूकता के मुद्दे पर बाबा रामदेव की भी प्रशंसा करता हूँ) हालाँकि मैं इनकी किसी भी गलत बात का कभी भी समर्थन नहीं करता, बल्कि खुलकर विरोध करता हूँ। क्योंकि मेरा मानना है कि सही बात का समर्थन हो, या ना हो, मगर गलत बात का विरोध हर हाल में होना चाहिए।

    इसी आधार पर मैं यह मानता हूँ कि मुद्दों पर दोनों के बीच मतभेद हो सकते हैं और मतभेदों का होना गलत भी नहीं हैं। दोनों की राहें जुदा भी हो जाएं मगर फिलहाल तक मंज़िल एक ही नज़र आती है।

    अरविन्द केजरीवाल और उनकी टीम ने एक कदम आगे बढ़कर जनता के बीच जाने का फैसला किया है, ताकि जनता उन्हें / उनके मुद्दों को / उनके द्वारा मुद्दों को उठाने के तरीके को या फिर उनके द्वारा व्यक्त किए गए समाधान को सीधे चुन सके या नकार सके। मुझे खुद यह लगता रहा है कि उनके द्वारा सुझाया गया भ्रष्टाचार के विरुद्ध 'जन लोकपाल' कानून पूरी तरह से व्यवहारिक नहीं है। कई मुद्दों पर मेरी राय अलग है, जिसे मैंने पहले भी कई बार अपने इस ब्लॉग एवं टिप्पणियों के माध्यम से व्यक्त किया है। मगर उनका यह कदम उन्हें अपने सुझावों को लागु करने का उत्तरदायित्व उठाने वाला दिखाता है।




    इसके बावजूद मैं यह भी मानता हूँ कि हममे से अधिकतर ने इन्हे अभी तक मीडिया या व्यक्तिगत तौर पर केवल जाना भर है, पहचाना नहीं है। और मुझे लगता है कि पहचानने के लिए मौका दिया जाना चाहिए, क्योंकि तस्वीर उसके बाद ही साफ़ हो पाएगी।








    Keywords: anna hazare, arvind kejriwal, jan lokpal, aam admi party, aap, delhi election

    2 comments:

    1. रखे ताजिया *जिया का, भैया अपने आप |
      अविश्वास रविकर नहीं, पर करता है बाप |

      पर करता है बाप, रही छवि अब ना उजली |
      कीचड़ में ही कमल, हाथ में चालू खुजली |

      चूर चूर विश्वास, किया क्या हाय शाजिया |
      अंतर दिया मिटाय, कहाँ हम रखें ताजिया ||
      *दीदी

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    2. आपकी उत्कृष्ट प्रस्तुति का लिंक लिंक-लिक्खाड़ पर है ।। त्वरित टिप्पणियों का ब्लॉग ॥

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