धर्मपत्नी की महिमा

Posted on
  • by
  • Shah Nawaz
  • in
  • Labels: , , ,
  • भय्या पत्नी की भी अजीब ही महिमा है। पता है कि आप कार्यालय में हैं, अब रोज़ ही जाते हैं तो वहीं होंगे। लेकिन श्रीमती जी का फोन पर एक ही सवाल होता है ‘कहां हो?’। अब बन्दा परेशान! हम भी चुटकी लेने के लिए बोल देते हैं कि ‘झुमरी तलैय्या में’! तो भड़क जाती हैं, ‘सीधे-सीधे नहीं कह सकते कि ऑफिस में हो’। अब श्रीमती जी जब पता ही था तो मालूम क्यों कर रही थी? लेकिन इतनी हिम्मत किसकी है कि यह मालूम कर ले?

    श्रीमती जी की सबसे पंसदीदा चीज़ होती है शापिंग। अब शापिंग तो शापिंग है, ज़रूरत हो या ना हो लेकिन करनी है तो करनी है। उस पर तुर्रा यह कि इतनी महंगी वस्तु इतनी सस्ती ले आई। दुकानदार से दाम तय करने की भी अलग ही अदा होती है। पता नहीं श्रीमती जी दुकानदार को बेवकूफ बनाती हैं या दुकानदार श्रीमती जी को? लेकिन कटता तो बेचारा पति ही है।

    थके हारे घर वापिस आए और आते ही आपके हाथ में चाय की प्याली आ गई तो समझो मामला गड़बड़ है। रोज़ तो चाय के लिए कहते-कहते थक जाते हैं, उस पर ज्यादा आवाज़ लगा ली तो सवाल ‘खुद क्यों नहीं बना लेते, देखते नहीं कितनी व्यस्त हूँ आपके बच्चों में’। ‘मेंरे बच्चे!’ मतलब अब यह बच्चे केवल मेरे हो गए। वैसे पत्नी के साथ छोटा तो कुछ होता ही नहीं है, चप्पल की ऐड़ी भी टूट गई तो समझो बड़ा नुकसान है। रास्ते में श्रीमती जी अपनी चप्पल तुड़वा बैठी, तो हमारे मूंह से निकल गया कि देख कर चल लेती। बस फिर क्या था ‘सस्ती चप्पलें दिलवाओगे तो यही होगा ना? इन्हे तो बस यही पसंद है कि रात-दिन घर में खपते रहो और कुछ मांगो मत। कहा था किसी अच्छे ब्राण्ड की दिलवा दो, लेकिन फर्क किसे पड़ता है? रास्ते में परेशान तो मैं हो रही हूँ ना।’ हम भी तपाक से बोले ‘लेकिन यह तुमने अपनी मर्ज़ी से ही तो खरीदी थी।’ जैसी दुकान पर ले जाओगे तो वैसी ही चप्पले खरीदूंगी ना।’ हमने मालूम किया ’लेकिन तुमने हमसे कब कहा था नई चप्पलों के लिए’? झट से बोली ‘तुम सुनते ही कब हो मेरी बात?

    रास्ते में एक लड़की हमें देख रही थी, अब किसी की आंखे तो बंद कर नहीं सकते। परेशानी की बात यह हो गई कि श्रीमती जी ने उसे हमें देखते हुए देख लिया। वैसे अन्दर की बात तो यह है कि आप यमराज को तो मना सकते हैं लेकिन रूठी हुई पत्नी को मनाना नामुमकिन है! बात पत्नी की हो और सास का ज़िक्र ना आए? ‘सास’ नाम सुनते ही पत्नी एकदम से बहु बन जाती है। सास के सामने तो माँ जी, माँ जी, लेकिन पति के सामने बात ‘तुम्हारी माँ जी’ पर आ जाती है। अजीब रिश्ता है भय्या, एक-दूसरे को देखकर तेवर बदलना कोई समझ ही नहीं पाया है।

    अंत में बस आपसे यही प्रार्थना है कि यह सब बाते मेंरी पत्नी को मत बताना, वर्ना!

    - शाहनवाज़ सिद्दीकी


    Keywords:
    Critics, Vyang, Wife, धर्मपत्नी, पत्नी

    35 comments:

    1. अंत में बस आपसे यही प्रार्थना है कि यह सब बाते मेंरी पत्नी को मत बताना, वर्ना!
      धमकी अगर आधी हो तो ज्यादा असर करती है !

      ReplyDelete
    2. Kamaal ka likha hai shahji. Maza aagaya.

      ReplyDelete
    3. very-2 nice post,पढ़कर मज़ा आ गया ,शाहनवाज़ भाई बहुत खूब

      ReplyDelete
    4. सटीक व्यंग्य और बेहतरीन पत्नी पुराण
      मजा आ गया

      प्रणाम स्वीकार करें

      ReplyDelete
    5. अच्छा व्यंग्य

      ReplyDelete
    6. शाहनवाज जी बहुत ही अच्छा लिखा है आपने ,आज समाज में पति पत्नी की मानसिकता को उजागर करती विषय पर सार्थक व्यंग के लिए आपका धन्यवाद |

      ReplyDelete
    7. कोई पत्नि से भी पूछे..... :):)

      अच्छा व्यंग

      ReplyDelete
    8. बढ़िया है!

      थोडा सा इंतज़ार कीजिये, घूँघट बस उठने ही वाला है - हमारीवाणी.कॉम



      आपकी उत्सुकता के लिए बताते चलते हैं कि हमारीवाणी.कॉम जल्द ही अपने डोमेन नेम अर्थात http://hamarivani.com के सर्वर पर अपलोड हो जाएगा। आपको यह जानकार हर्ष होगा कि यह बहुत ही आसान और उपयोगकर्ताओं के अनुकूल बनाया जा रहा है। इसमें लेखकों को बार-बार फीड नहीं देनी पड़ेगी, एक बार किसी भी ब्लॉग के हमारीवाणी.कॉम के सर्वर से जुड़ने के बाद यह अपने आप ही लेख प्रकाशित करेगा। आप सभी की भावनाओं का ध्यान रखते हुए इसका स्वरुप आपका जाना पहचाना और पसंद किया हुआ ही बनाया जा रहा है। लेकिन धीरे-धीरे आपके सुझावों को मानते हुए इसके डिजाईन तथा टूल्स में आपकी पसंद के अनुरूप बदलाव किए जाएँगे।....

      अधिक पढने के लिए चटका लगाएँ:

      http://hamarivani.blogspot.com

      ReplyDelete
    9. अब एक हक़ीकत शौहरों की भी सुन लो...पत्नी का फोन आता है तो जवाब होता है...क्या बात है...पता नहीं है बिज़ी हूं...जल्दी बोलो क्या लाना है...अच्छा ले आऊंगा...अब फोन रखो...

      अब खुदा न खास्ता किन्ही वो का फोन आ जाता है तो पहले तो मधुर आवाज़ में हैलो जी ही इतनी लंबी और दुनिया की मिठास लिए होती है कि सुनने वाली के कानों में मिश्री घुल जाए...बोलिए जी बोलिए...आज इस नाचीज़ की याद कैसे आ गई...अज़ी बंदा फुर्सत ही फुर्सत में है...कहिए क्या हुक्म है हुज़ूर का....

      जय हिंद...

      ReplyDelete
    10. :-)

      खुशदीप जी, आपने बिलकुल सही कहा. ;-)

      ReplyDelete
    11. गज़ब की हिम्मत दिखाई भाई ये सब लिखकर!

      पर बच के रहना आने वाली मुसीबत से।

      ReplyDelete
    12. शाहनवाज़ भाई क्या ब्लोग्वानी बंद हो गई है?

      काफी दिनों से केवल बिजी था इसलिए आप दोस्तों के ब्लोग्स ही खोल पाया था, आज ब्लोग्वानी पर गया तो देखा एक भी नै पोस्ट नहीं है. हॉट लिस्ट भी नहीं है. आपके ब्लॉग से वोट भी नहीं हो रहा है?

      ReplyDelete
    13. इस महत्व को समझना जरूरी है। आपको बधाई।

      ReplyDelete
    14. शाहनवाज़ भाई पत्नी पुराण, मर्दों का सबसे पसंदीदा विषय. ख़ूबसूरती से सुनाया. पत्नी कहीं देख लिया तो गयी भैंस पानी मैं...

      ReplyDelete
    15. शादी के दो दिन बाद लड़की अपनी मां से: मां मेरी उनसे लड़ाई हो गई है।
      मां : बेटा शादी के बाद झगड़े तो होते ही रहते हैं।
      लड़की: वो तो ठीक है पर अब लाश का क्या करूं?

      नये चुटकुले पढ़ते रहें :
      http://hansna.blogspot.com/
      Reply | Edit

      ReplyDelete
    16. Bilkul sahi kah rahe hain aap. Lekin jab bhi Bhabhi ji ke sath hon to jara IDHAR-UDHAR dyan se dekha kare.

      ReplyDelete
    17. बहुत ही मस्त है

      ReplyDelete
    18. are ye kuch likkha hai tume mere blog par aakar dekho zara isse kehte hai likhna

      ReplyDelete
    19. हम तो यह मानते हैं कि जैसा पति वैसी पत्‍नी। व्‍यंग्‍य अच्‍छा तो लगा लेकिन छोटा लगा।

      ReplyDelete
    20. हा हा हा हा हा हा मस्त पत्नी पुराणम!

      ReplyDelete
    21. खूब कही। सब खुश ही होंगे। धर्मपत्‍नी के सिवाय, जिनकी पोल खोली है और बंधु आपकी तो खैर नहीं ...

      ReplyDelete
    22. घर में पंगे ले रहे हो मियाँ ....
      शुभकामनायें !

      ReplyDelete
    23. आप हवा में उड़ न जायें इसलिये शादी कर दी जाती है । अब रहिये जमीन पर ।

      ReplyDelete
    24. आपकी ये घर-घर की कहानी मन में घर कर गयी ...बहुत ही बढ़िया...धाराप्रवाह शैली में लिखा गया आपका ये व्यंग्य बहुत पसंद आया

      ReplyDelete
    25. लो कर लो बात..
      हम तो अपने आपको ही खतावार समझते थे. बीवी से तो हम भी परेशन रहते हैं, चलो आप भी हो गये हमारे शरीके ग़म...मज़ाक कर रहा हूँ.
      अरे भाई घर भी तो जाना है.
      बहुत अच्छा लिखा KEEP IT UP

      ReplyDelete
    26. :) बेचारे पति..च च च

      ReplyDelete
    27. हा हा हा………………बढिया व्यंग्य।

      ReplyDelete
    28. वाह! आनंद से भर दिया ..अच्छा लिखते हैं आप...

      ReplyDelete
    29. जो करतूत्ं नहीं कि हैं वो भाभी को बताऊं या सारी मंडली को पार्टी दे रहे हो

      ReplyDelete
    30. सही है रोहित भाई, भाई को पिटवा के दम लोगे मतलब....

      ReplyDelete

     
    Copyright (c) 2010. प्रेमरस All Rights Reserved.