खुशदीप सहगल की बग़ावत

Posted on
  • by
  • Shah Nawaz
  • in
  • Labels: , ,
  • सतीश जी वाले प्रकरण के बाद हंगामा मचा हुआ है. एक तरफ पोल खुलने के कारण सतीश सक्सेना जी की हालत ना हँसते बनती है ना रोते, वहीँ दूसरी तरफ खुशदीप सहगल ने भी गैंग में बग़ावत कर दी है. उनको लगता है कि ज़रूर यह खबर और फोटो द्विवेदी जी या फिर मैंने लीक की हैं. उन्होंने बदला लेने के उद्देश्य से मक्खन परिवार को रॉकेट लोंचर पर चढ़ा कर द्विवेदी जी के यहाँ ब्लास्टिंग कर दी. बकौल सतीश जी मक्खन परिवार को तो मुशर्रफ जैसा शख्स नहीं झेल पाया तो फिर द्विवेदी जी क्या चीज़ हैं. कोर्ट में चाहें वह कितना ही धमाल मचा लें लेकिन यहाँ स्लोग ओवर को झेलना था. पहली बार तो मक्खन परिवार को घर पर देखते ही उनपर बेहोशी छाने लगी, वोह तो अच्छा है बाथरूम करीब ही था! म्म्म्मात्लब बाथरूम करीब होने के कारण श्रीमती द्विवेदी जी जल्दी से पानी का मग भर लाई  और उड़ेल दिया द्विवेदी जी के मुंह पर, तब जाकर तो वह होश में आये.

    यह एक ब्लोगर का ही जिगरा था कि पुरे एक दिन झेला उन्होंने मक्खन परिवार को, वर्ना अच्छे-अच्छों को नानी याद आ जाती है. रात को जब दिल्ली यात्रा संस्मरण पोस्ट लिखने बैठे तो अचानक उन्हें मेरी याद आई और पोस्ट ठेलते-ठेलते उन्होंने पूरी प्लानिंग कर ली मक्खन परिवार से छुटकारा पाने की. रात भर सो नहीं पाए और सुबह होते ही मक्खन परिवार को कानूनी बातों में उलझा कर दिल्ली के लिए रवाना कर दिया और जेब में मेरे पते की पर्ची डाल दी. :-(

    फिर क्या था, मक्खन परिवार पहुँच गया मेरे द्वारे:

    मरता क्या ना करता, "भाआआई" का डर और वह भी खुशदीप भाई जैसे खतरनाक भाआआई का, इसलिए कुछ कह भी नहीं सकता था. खूब धूम-धाम से मालाएं-वालाएं डाल कर स्वागत किया.


    जिस स्लोग ओवर नाम के हथियार से मक्खन-ढक्कन-मक्खनी के द्वारा वह पूरे ब्लॉग जगत को फोड़ते आये थे, वाह आज मेरे द्वारे खड़ा था. उस पर प्लस पॉइंट यह कि मक्खन-मक्खनी का सुपुत्र छक्कन भी साथ था. छक्कन कैसा हथियार होगा, जिसे खुशदीप भाई ने आड़े वक़्त के लिए संभाल के लिए रखा था, यह सोच कर ही जान निकल गई.


    उनको एक कमरे तक पहुँचाया गया, थोड़ी देर बाद जाकर चेक किया तो वह वहां पर धमाल मचा रहे थे.



    उनकी इस हरकत पर मैंने भूख हड़ताल का फैसला कर लिया है, अगर खुशदीप भाई ने इन्हें अपने घर वापस बुलाकर अपनी पोस्टों में नहीं ठेलते हैं तो मैं भी जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर ही बैठा रहूँगा.



    रोज़-रोज़ तड़प-तड़प कर मरने से तो अच्छा है कुछ किया जाए...




    क्या ख्याल है आपका???





    Keywords: protest, slogver, deshnama.com, khushdeep sehgal, makkahan family, dhakkan, dineshrai dwivedi, satish saxena, blog jagat.

    42 comments:

    1. मेरी यह पोस्ट उन तमाम लोगो के लिए है जिनको बात बात में कब्ज की शिकायत हो जाती है (डाक्टरों का मानना है की कब्ज तनाव की वजह से भी होता है ) अब ब्लाहिंग करना और तनाव का होना एक दुसरे से सम्बंधित है. पोस्ट डाल दी लेकिन एकु कमेंटवा नाही दिख रहा. नतीजा तनाव. लोग मेरी पोस्ट को पढ़ नही रहे. नतीजा तनाव. रात में दो बजे उठकर देखा की सूर्यभान ने पोस्ट लिख दी. तनाव हुई गवा. लोग मेरी इज्जत नही कर रहे सम्मान नही कर रहे बड़ा ब्लॉगर नही मान रहे. फिर तनाव अब क्या होगा? होगा क्या कब्ज हो जाएगा और क्या? तो साहिबान ऐसे लोगो के लिए एक शफाखाना खुल गया है. इस शफेखाने में जाने के बाद आपकी कब्जियत दूर की जायेगी. गारटेड इलाज. चैलेन्ज . गलत साबित करने वाले को एक लाख रूपये का नकद ईनाम. इस पोस्ट की कटिंग लाने वाले को ९०० रूपये की छूट दी जायेगी. लेकिन सावधान नक्कालों से इस नाम से मिलते जुलते लोगो के यहाँ जाकर मरीजों ने शिकायत की है. डॉ जानवर शौचाल खानदानी एक मात्र असली सबसे बड़े वाले डाक्टर साहब है हालांकि शौचक्रिया होनोलूलू रिटर्न . तो आज ही अपनी बुकिंग कराइए.

      ReplyDelete
    2. मैं तो शुरू से ही कह रही हूँ कि जंतर-मंतर पर बैठा दो इनको। जनता ही अब न्‍शय करेगी।

      ReplyDelete

    3. लगता है अनशन का दौर चल रहा है ! http://purviya.blogspot.com/2011/05/blog-post_9184.html?showComment=1304490978816#c337421479416650781

      मैं खुद सुबह से कुत्तों के साथ उनकी इज्ज़त बचाने के लिए अनशन पर बैठा हूँ ...उन्होंने अपना चेयरमैन अनशन कमिटी मुझे घोषित करते हुए माला पहना दी है !

      अब सोंचता हूँ की यह कुत्ते सो जाएँ तब भागूं यहाँ से ....मुसीबत यह है कि चौकीदारी पर डाबरमैन और जर्मन शेपर्ड खड़े हैं ...नहीं तो कबका आपकी मदद को पंहुच जाता !

      मक्खन फैमिली का तोड़ और मंतर केवल खुशदीप सहगल को पता है ! उन्ही की मदद मांगो ....

      शुभकामनायें

      ReplyDelete
    4. मक्खन फैमिली जिंदाबाद

      ReplyDelete
    5. jai baba banaras....

      ham aap ke saath hai

      jai baba banaras.......

      ReplyDelete
    6. कहते हैं न खोटा सिक्का भी काम आ जाता है...
      मेरे मक्खन,मक्खनी,ढक्कन, गुल्ली और अब शहनवाज की कृपा से छक्कन और आ गया है...द्विवेदी जी और शहनवाज ने मुझे इतना हंसाया है, इतना हंसाया है कि सारा गुस्सा नजले की तरह बह गया है...अब इस मक्खन परिवार के आंसू देखे नहीं जा रहे...ये देख और भी कष्ट हुआ कि बेचारों का मेरे सिवा कहीं और ठिकाना भी नहीं है...और मैं भी इनके बिना कहां एक पल भी चैन से रह पाया...लेता हूं बेचारों का हाल...

      जय हिंद...

      ReplyDelete
    7. मक्खन परिवार को ट्रेन में बिठाने के बाद मैं ने खुशदीप भाई को फोन किया था। वे बोले थे कि वे ठीक वक्त पर ह.निजामुद्दीन स्टेशन पर उन्हें संभाल लेंगे। लेकिन लगता है, खुशदीप भाई कहीं जाम में फँस गए। आप के पते की पर्ची मैं ने मक्खन की जेब में जरूर डाली थी। मक्खन परिवार स्टेशन पर गाड़ी से उतर कर सीधे आप के घर पहुँच गया।
      उधर खुशदीप भाई जरूर परेशान हो रहे होंगे कि मक्खन परिवार आखिर गया तो कहाँ?
      आप उन्हें जल्दी से फोन कीजिए और बता दीजिए, वर्ना उधर खुशदीप और इधर जंतर-मंतर पर आप परेशान होते रहेंगे।

      ReplyDelete
    8. बगावते बेकार नही जाती

      ReplyDelete
    9. चलिए अब उठाइए अपना धरना जंतर-मंतर से। खुशदीप पहुँच रहे हैं मक्खन परिवार को लेने के लिए। आज तो पार्टी करने का दिन है।

      ReplyDelete
    10. अरे वाह!!!!!! खुशदीप भाई मान गए!!!!! हो हो हो... हु हु हु.... यस... यस.. यस...



      धरना ख़त्म.... संतरे का रस पिलाने खुशदीप भाई आने वाले हैं...



      भाई हो तो ऐसा!!!!!!

      ReplyDelete
    11. मख्खन परिवार की जय हो

      ReplyDelete
    12. वाह वाह.... खुशदीप भैया बड़े सुशील
      भाई शाहनवाज ले आये इन्हें मोतीझील
      --

      ReplyDelete
    13. हम भी आ रहे हैं जंतर मंतर....आखिर कब तक मख्खन मख्खनी को नहीं बुलायेंगे खुश दीप...देखते हैं...

      ReplyDelete
    14. ufff!! sach me pure sharir me gudgudi ho gayee:D

      ReplyDelete

    15. ऒऎ तेरी.. मुँडे को मक्खन बना दिया ?
      भाई पहले तो मेरा ऎतराज़ दर्ज़ कर, टिप्पणी बाद में मिलेगी !

      ReplyDelete
    16. फिलहाल परिवार अनाथालय में पल रहा है... सह्नावाज़ भाई भी पालने में लिटा कर घंटा बजा आये हैं... देखते हैं कब तक कोई गोद लेने आता है

      ReplyDelete
    17. मुझे तो मक्खनी बडी सुंदर ओर भोली भाली लग रही हे... ओर डक्कन बेचारा दो दिन से भुखा हे, कब करनी हे भुख हडताल ? मुझे भी बता देना, मै भी साथ मे बेठूंगा भुख हडताल पर, लेकिन पहले बता देना, साथ मे मठ्टिया बनवा लुंगा, चोरी चोरी कुतरेगे दोनो... बताना नही किसी को

      ReplyDelete
    18. डैमेज कंट्रोल पर भाई शाहनवाज़ जुट गए तुरंत और आखि़कार ‘क़लम का सिर क़लम होने से बच गया।
      धन्यवाद शाहनवाज़ भाई !
      इस सब बवंडर से जो सबक़ मिला है, वह कोई भी अपने ताल्लुक़ात बिगड़ने के डर से कहने के लिए तैयार नहीं है।
      वह सबक़ यह है कि ‘किसी को अपने इलाक़े का समझकर उसकी ग़लतियों में उसका साथ मत दो।‘

      http://ahsaskiparten.blogspot.com/2011/05/save-your-pen.html

      ReplyDelete
    19. श्रीमान जी, मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

      ReplyDelete
    20. डॉ. अमर कुमार जी... मुंडे को मक्खन नहीं बनाया, बल्कि मुंडे (खुशदीप भाई) ने मक्खन को बनाया है... अब जब उनके प्रोडक्ट हैं तो सब के सब उनके जैसे ही दिखाई देंगे ना? आपने रजनीकांत की मूवी "रोबोट" नहीं देखी है?

      :-) :-) :-)

      ReplyDelete
    21. @ DR. ANWER JAMAL

      अनवर भाई, हम किसी के गुनाह में साथ कभी देते ही नहीं हैं... और जिस तरफ आप इशारा कर रहे हो, उसे मैं गुनाह मानता भी नहीं हूँ... वैसे भी हर इंसान का सोचने का अपना नजरिया होता है और हर एक को अपने हिसाब से सोचने का हक भी है.... हाँ मैं यह ज़रूर मानता हूँ कि कुछ कमियां ज़रूर थी, लेकिन वह तो हर जगह थोड़ी-बहुत हो जाया ही करती हैं...

      ReplyDelete
    22. ऐसी ब्लागर मीट तो रोज़ होनी चाहिये कम से कम अच्छे व्यंग तो पढने को मिले। मक्खन फैमिली क्या बात है\ बेटा जी मेरी फोटो त्प भेज दो इनाम लेते हुये कम से कम ब्लागजग्त की यादेम टाआज़ाआ ऋआःऎम।

      ReplyDelete
    23. श्रीमान जी, क्या आप हिंदी से प्रेम करते हैं? तब एक बार जरुर आये. मैंने अपने अनुभवों के आधार ""आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें"" हिंदी लिपि पर एक पोस्ट लिखी है. मुझे उम्मीद आप अपने सभी दोस्तों के साथ मेरे ब्लॉग www.rksirfiraa.blogspot.com पर टिप्पणी करने एक बार जरुर आयेंगे. ऐसा मेरा विश्वास है.

      श्रीमान जी, हिंदी के प्रचार-प्रसार हेतु सुझाव :-आप भी अपने ब्लोगों पर "अपने ब्लॉग में हिंदी में लिखने वाला विजेट" लगाए. मैंने भी कल ही लगाये है. इससे हिंदी प्रेमियों को सुविधा और लाभ होगा.

      ReplyDelete
    24. ब्लॉग जगत में पहली बार एक ऐसा सामुदायिक ब्लॉग जो भारत के स्वाभिमान और हिन्दू स्वाभिमान को संकल्पित है, जो देशभक्त मुसलमानों का सम्मान करता है, पर बाबर और लादेन द्वारा रचित इस्लाम की हिंसा का खुलकर विरोध करता है. साथ ही धर्मनिरपेक्षता के नाम पर कायरता दिखाने वाले हिन्दुओ का भी विरोध करता है.
      आप भी बन सकते इस ब्लॉग के लेखक बस आपके अन्दर सच लिखने का हौसला होना चाहिए.
      समय मिले तो इस ब्लॉग को देखकर अपने विचार अवश्य दे
      .
      जानिए क्या है धर्मनिरपेक्षता
      हल्ला बोल के नियम व् शर्तें

      ReplyDelete
    25. क्या ब्लॉगर मेरी थोड़ी मदद कर सकते हैं अगर मुझे थोडा-सा साथ(धर्म और जाति से ऊपर उठकर"इंसानियत" के फर्ज के चलते ब्लॉगर भाइयों का ही)और तकनीकी जानकारी मिल जाए तो मैं इन भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करने के साथ ही अपने प्राणों की आहुति देने को भी तैयार हूँ. आज सभी हिंदी ब्लॉगर भाई यह शपथ लें

      ReplyDelete
    26. कमैंट समेटने के हिसाब से अच्छी पोस्ट है... वैसे और भी बहुत से महत्वपूर्ण मुद्दे हैं जिन पर लिखा जा सकता है... ब्लोगर्स मीट से अगल हट कर
      ;)

      ReplyDelete
    27. मोहिन्दर जी, पहली बात तो यह की यह एक व्यंग्य है, ब्लोगर मिलन की कोई रिपोर्ट नहीं... दूसरी बात यह कि बेशक बहुत से मुद्दे हैं लिखने के लिए... तो क्या ब्लोगर मिलन लिखने वाला मुद्दा नहीं है? हर एक वोह काम जिससे लोगों के दिल मिलते हैं, नजदीकियां बढती हैं, एक-दुसरे के विचार जानने का मौका मिलता है... बेशक ऐसा कार्य मेरे लिए भी लिखने वाला मुद्दा है...

      ReplyDelete
    28. बहुत खूब शाह नवाज़ जी..मैं तो हँसते हँसते लोटपोट हो गया..बड़ी ही रोचक ब्लॉग meet थी..शुभकामनाएं..

      ReplyDelete
    29. भाई ये खुशदीप जी के बाजू में कौन सी कन्या है ? पहचान नहीं पा रहा हूँ क्या ये ब्लागजगत से हैं ...रोचक ...

      ReplyDelete
    30. महेन्द्र मिश्र जी,

      इस पोस्ट में खुशदीप भाई की कोई फोटो है ही नहीं.... :-)

      यह सारे तो खुशदीप भाई के बनाये कैरेक्टर्स मक्खन, मक्खनी ओर ढक्कन हैं... इन्हें बिलकुल रोबोट फिल्म के हिसाब से बनाया गया है.... जैसे रजनीकांत का बनाया रोबोट रजनीकांत की ही तरह दीखता था, ऐसे ही खुशदीप भाई के कैरेक्टर्स खुशदीप भाई जैसे ही दीखाई दे रहे हैं... :-) :-) :-)

      ReplyDelete
    31. जंतर मंतर पर हड़ताल पर बैठने का मतलब काम का पक्का सिद्ध होना...आपकी माँग भी ज़रूर पूरी होगी. बढ़िया व्यंग...बधाई

      ReplyDelete
    32. क्या कहूँ?.. रोचक पोस्ट।

      ReplyDelete

     
    Copyright (c) 2010. प्रेमरस All Rights Reserved.