देशभक्ति की नई परिभाषा

Posted on
  • by
  • Shah Nawaz
  • in
  • Labels: , ,
  • आजकल देशभक्त (नई परिभाषानुसार "राष्ट्रवादी") होना कितना आसान है ना? किसी विशेष धर्म से ताल्लुक रखो, या फिर विशेष पार्टी अपना लो, या फिर देशभक्ति पर शेरो-शायरी करो, कविताएँ रचो, क्रिकेट टीम के जीतने पर जश्न मनाओ, पटाखे छोडो...

    छोडिये, यह सब भी बस का नहीं है तो ब्लॉग / फेसबुक / ट्विटर पर स्टेटस / पोस्ट अपडेट करो, बस बन गए देशभक्त। फिर कुछ भी करते फिरो, चाहे घृणा फैलाओ, दंगे करो, रिश्वत लो-दो, दब कर मिलावट करो, खूब सड़कों पर कूड़ा फेकों, सड़के घेरों, अवैध कब्ज़े करो, झूठ बोल कर सामान बेचो, रास्तों के अवरोधक बनो, जगह-जगह थूकते फिरो इत्यादि इत्यादि...

    सरहदों पर दुश्मन हवाओं का रुख मोड़ने और शहीद होने के लिए तो सेना के जवान हैं ना... बस उनकी याद में झूठे आंसू बहाना मत भूलना या फिर स्टेटस अपडेट!










    Keywords: indian, corruption, deshbhakt, rashtravadi, rashtrwad, patriotic, patriotism

    6 comments:

    1. आपकी इस पोस्ट से में कतई सहमत नहीं हूँ ! देशभक्ति की परिभाषा ना ही कभी बदली है और ना ही बदलेगी और उसका संबध किसी भी पार्टी ,धर्म से नहीं होता बल्कि देश के प्रति दिल में प्यार से उसका संबंध होता है ! कवि ,लेखक आदि अपनी कविताओं और लेखों द्वारा ही देश के प्रति अपनें प्यार को स्वर और शब्द देते हैं और उसको दिखावा कहना गलत है !

      ReplyDelete
      Replies
      1. बिलकुल आपकी बात सही है और मेरा भी यही मानना है..... मगर मेरा कटाक्ष उन लोगो पर है जो यह ऐसा सोचते हैं, जो बात-बात पर देशभक्ति का सबूत मांगते हैं, फिर चाहे खुद कितने ही देशद्रोही कामों में लीन हों। और साथ ही यह कटाक्ष उन लोगो पर भी है जो देश भक्ति पर बड़ी-बड़ी बातें तो करते हैं लेकिन ऊपर लिखे गलत कामों से देश का रात-दिन नुक्सान कर रहे हैं।

        Delete
    2. "किसी विशेष धर्म से ताल्लुक रखो, या फिर विशेष पार्टी अपना लो, या फिर देशभक्ति पर शेरो-शायरी करो, कविताएँ रचो, क्रिकेट टीम के जीतने पर जश्न मनाओ, पटाखे छोडो."

      हा-हा-हा …. क्या कहना चाहते थे सर जी :) वैसे यह बोलना कि मैं भक्त हूँ, कम से कम उस भाषा से तो ज्यादा कर्ण-प्रिय भाषा है कि मैं अबके संसंद सत्र में भी वन्दे-मातरम् नहे गाऊंगा ! :) :)

      ReplyDelete
      Replies
      1. छोडिये आप भी किन की बातें ले कर बैठ गए, उन्हें वन्दे-मातरम से परहेज़-वरहेज़ कुछ नहीं है, उन्हें तो बस अपनी राजनीती चमकानी है। बाकी ऊपर लिखा मेरा कमेन्ट आपकी बाकी बातों के लिए यहाँ भी लिख रहा हूँ-

        "मेरा कटाक्ष उन लोगो पर है जो ऐसा सोचते हैं, जो बात-बात पर देशभक्ति का सबूत मांगते हैं, फिर चाहे खुद कितने ही देशद्रोही कामों में लीन हों। और साथ ही यह कटाक्ष उन लोगो पर भी है जो देश भक्ति पर बड़ी-बड़ी बातें तो करते हैं लेकिन ऊपर लिखे गलत कामों से देश का रात-दिन नुक्सान कर रहे हैं।"

        Delete
    3. आपकी इस ब्लॉग-प्रस्तुति को हिंदी ब्लॉगजगत की सर्वश्रेष्ठ प्रस्तुतियाँ ( 6 अगस्त से 10 अगस्त, 2013 तक) में शामिल किया गया है। सादर …. आभार।।

      कृपया "ब्लॉग - चिठ्ठा" के फेसबुक पेज को भी लाइक करें :- ब्लॉग - चिठ्ठा

      ReplyDelete
    4. कल 26/01/2014 को आपकी पोस्ट का लिंक होगा http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर
      धन्यवाद !

      ReplyDelete

     
    Copyright (c) 2010. प्रेमरस All Rights Reserved.