मुझको इस सफ़र का थका हुआ रहबर न समझना बस हम-कदम रहो, अगर चलने की सनक बाकी है कुछ अलग हटके पढने को मिला आपके ब्लॉग पर .अभिनव विषय और प्रस्तुति के लिए , आभार आपका .वो कहते हैं न की सब्र का फल मीठा होता है तो भाई साहब सुबह से कोशिश में थे ये 'प्रेम रस .कोम' साहब खुल जाएँ आखिर हीरा हाथ लग ही गया .बढ़िया ग़ज़ल पढनेको मिली क्या मतला क्या मक्ता और क्या विषय वस्तु .तारीफ़ करूं क्या इसकी जिसने इसे सजाया -
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मुझको इस सफ़र का थका हुआ रहबर न समझना
ReplyDeleteबस हम-कदम रहो, अगर चलने की सनक बाकी है
कुछ अलग हटके पढने को मिला आपके ब्लॉग पर .अभिनव विषय और प्रस्तुति के लिए , आभार आपका .वो कहते हैं न की सब्र का फल मीठा होता है तो भाई साहब सुबह से कोशिश में थे ये 'प्रेम रस .कोम' साहब खुल जाएँ आखिर हीरा हाथ लग ही गया .बढ़िया ग़ज़ल पढनेको मिली क्या मतला क्या मक्ता और क्या विषय वस्तु .तारीफ़ करूं क्या इसकी जिसने इसे सजाया -
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http://kabirakhadabazarmein.blogspot.in/शुक्रिया .
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हौसला अफजाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया वीरू भाई जी.....
DeleteWAAH
ReplyDeleteबस आपकी पोस्ट देखकर यूँ ही खामखा लिख डाली :-)
Deleteकभी फुर्सत मिली तो ठीक करके पूरी लिखूंगा....
waah !!!!!!!!!!!
ReplyDeleteशुक्रिया मनोहर जी.
Deleteबस हम-कदम रहो, अगर चलने की सनक बाकी है
ReplyDeleteबहुत खूब
जी... बहुत-बहुत शुक्रिया वर्मा जी...
Deleteसनक हर जगह हावी है.
ReplyDeleteमेरे ब्लॉग पर आपका खैर-मकदम है बादल मेरठी जी....
Deleteयह तो सनक बनी रहेगी,
ReplyDeleteसिक्कों में खनक बनी रहेगी,
चलीं कुछ राहें भटकन में सही,
समय से तो रार ठनी रहेगी।
अरे वाह प्रवीण भाई!!!!!
Deleteऔर कुछ न कहते हुए बस एक ही शब्द दिमाग में आरहा है वाह!!! बहुत खूब लिखा है आपने उम्दा पोस्ट
ReplyDeleteहौसला अफज़ाई के लिए बहुत-बहुत शुक्रिया पल्लवी जी...
Deleteबहुत बढ़िया.... अच्छे लगे शेर ....
ReplyDeleteVery beautiful...First two lines are too good...
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