250 साल पुरानी एक महान अमेरिकी सभ्यता की हालत अब ऐसी लग रही है जैसे पुराना स्मार्टफोन — दिखता अभी भी “प्रो”, पर अंदर से हैंग! एटॉमिक ताकत का जो ढोल पीटा गया था, वो निकला वही — दूर से धांसू, पास से फुस्स पटाखा।
अब दुनिया भर के देश लाइन में खड़े हैं — “भाईसाहब, जो नुकसान हुआ है उसका UPI ID दीजिए, क्लेम भेजना है!” और अगर पैसे की दिक्कत हो, तो ट्रम्प टावर की “क्लियरेंस सेल” लगा दो — “आज लो, कल पछताओ ऑफर” 😄
और इस युद्ध के बाद की असलियत यह है कि — दुनिया की “सुपरपावर” वाली कुर्सी अब अमेरिका के नीचे से खिसककर रूस, चीन और ईरान के पास चली गई है। अमेरिका का हाल ऐसा कि जैसे इंटरव्यू में बहुत अंग्रेज़ी झाड़ी, और आख़िर में “We’ll get back to you” सुनकर घर आ गया। 😂
निष्कर्ष: शोर बहुत था, शो कम निकला…
और अंत में अमेरिका वही निकला —
“बड़ा खिलाड़ी, लेकिन खाली पिच”! 😜


बढ़िया 🙂🙂
ReplyDeleteशुर्क्रिया राजीव भाई 😊
Deleteयुद्ध से जमीन जीती जा सकती है दिल नहीं, असली राजा वही होता है जो दिलों को जीते, दिलों को जीतने के लिए प्रेम करुणा व न्याय का होना जरूरी है
Deleteबस यह इतनी सी बात ही तो है, जिस दिन लोग समझ लेंगे, उस दिन किसी दुनिया हसीन बन जाएगी…
Deleteयह पोस्ट पढ़कर मुझे इसका व्यंग्य काफी मजेदार और तेज़ लगा। तुमने ट्रम्प और अमेरिका को लेकर जो व्यंग्य किया है वह असरदार है। यह राजनीतिक हास्य सीधा ध्यान खींचता है। मैं इसे सिर्फ मजाक नहीं बल्कि एक टिप्पणी मानता हूं। इसमें तुमने मौजूदा वैश्विक सोच पर सवाल उठाया है।
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