भारतीय मुस्लिम्स को सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना होगा


जापान पर अमेरिका द्वारा परमाणु बम गिराए जाने और ज़मीन पर कब्ज़ा करने के बाद जापानियों ने कब्जा छुड़वाने के लिए कोशिशें करने की जगह शिक्षा का 20 वर्षीय मॉडल तैयार किया। और उसका परिणाम यह हुआ कि 1971 आते-आते जापान तकनीक में इतना आगे निकल गया कि अमेरिका को स्वयं ही जापान के शहरों से कब्ज़ा हटाना पड़ा।

दूसरी तरफ अगर मैं मुस्लिम समाज की बात करूं तो समाज की 80-90% आबादी आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है और हम आज भी अपने हालात पर फिक्र करने की जगह, पॉज़िटिव अप्रोच से प्लानिंग बनाने की जगह नेगेटिविटी पर जमे हुए हैं, दूसरों की कमिंयाँ ढूंढने में व्यस्त हैं। हमारे पास तो हालात को ठीक करने के काम में से चंद मिनट भी इन फालतू चीज़ों के लिए नहीं होने चाहिए थे।

ऐसा नहीं है कि सिर्फ बाबा साहब भीमराव अंबेडकर ने दलित और पिछड़े समाज के लिए काम किया, बल्कि असलियत यह भी है कि दलित और पिछड़े समाज ने भी उनका वैसे ही साथ दिया। अगर वो मुस्लिम समाज से होते तो हम में से अधिकतर तो उनके फ़िरक़े या फिर धार्मिक विचारों पर उंगली उठा रहे होते और बाकी बचे हुए लोग उन पर उठी हुई उंगलियों पर बहस कर रहे होते, उन पर विश्वास कर चुके होते। और ऐसा इसलिए है कि जब कोई किसी समाज के शिक्षित होने की कोशिश करता है तो समाज के ठेकेदारों को अपनी मठाधीशी खत्म होते हुए नज़र आती है और इसलिए वो ऐसे प्रयास में लगे लोगों के खिलाफ इमोशंस को भड़काकर धर्म विरोधी या फिर समाज विरोधी ठहराने की कोशिश करते हैं।

इसलिए किसी भी हालत में इमोशंस को भड़कने से बचाना है और किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले या फिर विरोध से पहले ठंडे दिमाग से सिक्के के हर पहलू को परखना ज़रूरी है।

आज अगर हम अपनी हालात सुधारना चाहते हैं तो उच्च शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर ध्यान देना होगा। अभी से रुट लेवल पर प्लान बनाकर इम्प्लीमेंट करने की शुरुआत करनी होगी।


- शाहनवाज़ सिद्दीक़ी


10 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (02-04-2020) को   "मुस्लिम समाज को सकारात्मक सोच की आवश्यकता"   ( चर्चा अंक-3672)    पर भी होगी। -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    -- 
    कोरोना को घर में लॉकडाउन होकर ही हराया जा सकता है इसलिए आप सब लोग अपने और अपनों के लिए घर में ही रहें।
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।  
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 

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    1. शुक्रिया शास्त्री जी

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  2. आपकी बात सही है , कुछ लोग चाहते ही नहीं है कि मुस्लिम पुरातनपंथी से बँधे रहें। पढ़ा लिखा वर्ग प्रबुद्ध है, वह धारा के साथ चल रहा है । राजनीति के लिए उन्हें भटका दिया जाता है ।

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  3. आपकी बात सही है , कुछ लोग चाहते ही नहीं है कि मुस्लिम पुरातनपंथी से बँधे रहें। पढ़ा लिखा वर्ग प्रबुद्ध है, वह धारा के साथ चल रहा है । राजनीति के लिए उन्हें भटका दिया जाता है ।

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  4. आज के समय में आपकी जैसी सोच वाले साथियों की ही जरुरत है साथी । बहुत स्नेह आपको शाहनवाज़ भाई । 🙏🙏🙏🙏

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  5. आप जैसे पढ़े लिखे और सार्थक सोच वाले लोग इस दिशा में काम कर सके तो बहुत बड़ी बात होगी। लगभग हर समाज झूठे चकाचौंध से प्रभावित होते हैं। मेहनत का रास्ता दिखाना होगा उन्हें !

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