यह हमारा हिन्दोस्तां है, जहाँ मज़हब दोस्ती का सबब है, जहाँ विभिन्न धर्मों के लोग साथ रहते हैं, खाते हैं, पढ़ते हैं और साथ ही अपनी-अपनी पूजा भी कर लेते हैं....
हज़ारों साज़िशें कमतर हैं दुश्मनी के लिए
मेरे वतन में तो 'मज़हब' हैं दोस्ती के लिए
- शाहनवाज़ 'साहिल'
झुलस रहा है देखो , हर ओर मेरा वतन
ReplyDeleteसेंक रहा चिता कोई , अपने ही हमवतन की !!
सु-मन
http://arpitsuman.blogspot.in/2016/02/blog-post_24.html
ये धरा बेच देंगे गगन बेच देंगे .... ये बाग़ों के माली चमन बेच देंगे . . . मेरे देश के जवानों यूँही सोये रहे अगर तुम .. . . तॊ वतन के ये मसीहा वतन बेच देंगे.
ReplyDelete