ग़ज़ल: नयन उनके जबसे हमें भा गए हैं




नयन उनके जबसे हमें भा गए हैं
वो तबसे निगाहें चुराते गए हैं

हर इक शाम कटती थी कूचे में मेरे
कहीं और के रास्ते भा गए हैं

वो यूँ जाने वाला कहाँ तक चलेगा,
जो हरसू लगेगा कि हम आ गए हैं

हुई महफ़िलों में तबाही की बातें
जो पर्दा उठा करके वोह आ गए हैं

मेरी आशिकी की कशिश देखिये तो
नज़र नीची करके वो शरमा गए हैं

अभी तक थे मशहूर जलवे सनम के
मगर आज अपने गज़ब ढा गए हैं

- शाहनवाज़ 'साहिल'





23 comments:

  1. Hey Shah Nawaz! It's very beautifully written!! I loved it man:)
    Naazuk khayaal...nazaakat se kahaa gayaa hai!

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    1. हौसला अफज़ाई के लिए शुक्रिया अमित जी...

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  2. आपकी यह बेहतरीन रचना शनिवार 01/09/2012 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in पर लिंक की जाएगी. कृपया अवलोकन करे एवं आपके सुझावों को अंकित करें, लिंक में आपका स्वागत है . धन्यवाद!

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    1. शुक्रिया यशोदा जी...

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  3. क्या बात है, शाहनवाज भाई!!

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    1. :-) छोटी सी कोशिश भर है सतीश सत्यार्थी भाई...

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  4. बहुत खूब सर!


    सादर

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  5. वाह. य
    थार्थ के दि‍नों आजकल श्रृंगार का तो वर्ना ज़माना ही नहीं रहा /:-)

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    1. हौसला अफज़ाई के लिए शुक्रिया संगीता जी...

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    1. शुक्रिया मन्टू भाई...

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  8. वाह जी क्या खूब लिखा है आपने बहुत खूब जनाब...

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    1. हौसला अफज़ाई के लिए शुक्रिया पल्लवी जी, एक छोटी से कोशिश भर है... :-)

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  9. Bahut sundar...The starting lines are awesome...:)

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  10. मेरी आशिकी की कशिश देखिये तो
    नज़र नीची करके वो शरमा गए हैं

    वाह क्या बात है ।

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  11. बेहद उम्दा गजल,शुक्रिया शाह नवाज जी.

    मनोज जैसवाल

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  12. बहुत खूब भाई साहब !

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  13. हुई महफ़िलों में तबाही की बातें
    जो पर्दा उठा करके वोह आ गए हैं ..

    वाह ... क्या गज़ब शेर है ... तबाही तो होनी ही है इस तरहा ... लाजवाब गज़ल ...

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  14. वो यूँ जाने वाला कहाँ तक चलेगा,
    जो हरसू लगेगा कि हम आ गए हैं ...

    बहुत खूब शेर है इस गज़ल का ... उम्दा गज़ल ...

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