व्यंग्य" कैसे कैसे हार्न

हार्न भी भईया बड़े अजीब-अजीब तरह के होते है। एक होंडा सिटी निकली तो उसका हार्न सुनकर लगा, जैसे उसके मालिक ने कार का गला घोंट दिया है और बड़ी मुश्किल से वह बेचारी कहने की कोशिश कर रही है कि ‘आगे से हट जाओ जी’। वैसे अधिकतर लोग अपने मिजाज़ के मुताबिक ही हार्न लगाते है। कुछ हार्न तो ऐसे बजते है जैसे डांट रहे हो, "हट बे!" वहीं कुछ पशु प्रेमी होते हैं, उनके हार्न सुन कर लगता है जैसे कोई बुल-डॉग पीछे से आ रहा है। एक बार तो अचानक पीछे से शेर कि चिंघाड़ सुन कर हाथ कांप गया और डर के मारे हमारा स्कूटर फुटपाथ से टकराते-टकराते बचा। लेकिन बाद में पता चला कि पीछे से शेर नहीं, बल्कि एक अजीब से मूंह वाली मोटर साईकिल हार्न बजाते हुए तेज़ी से गुज़र गई है। कुछ तो दुसरों को डराने के लिए ही हार्न लगाते हैं, एकदम करीब आकर तेज़ी से हार्न बजाते है। अगर अगला डर जाए तो उस पर दांत फांड़ते हुए किसी और को बकरा बनाने के लिए निकल जाते हैं। ट्रक और कैब के हार्न ऐसे होते हैं, जैसे कोई बच्चा अपने खिलौने के उपर बैठ गया हो और खिलौना दम घुटने से बचने के लिए लगातार चिल्ला रहा हो टूँ-टूँ-टूँ-टूँ.....। उसपर बच्चा हटने की जगह उसकी आवाज़ से और भी खुश हो रहा हो। अब किसी की हिम्मत तो होती नहीं कि उन्हे कुछ कह दे, हां हार्न ही निकल कर डाईवर से कहे "भईया गला घोट कर ही छोड़ोगे क्या?" तो अलग बात है। क्या कह रहे हो ट्रैफिक पुलिस? अरे यार ‘हफ्ता’ उनको कुछ सुनने-देखने देता है भला?

कई बार गाड़ी के पीछे से आकर लोग ऐसे हार्न बजाते है जैसे कह रहे हो ‘पिछे हट! गा़ड़ी के ब्रेक फेल हैं’। और अगर आपने गाड़ी साइड नहीं की तो लगता है पीछे से धक्का ही दे देंगे। अगर कुछ शरीफ हुए तो ब्रेक को बिना तकलीफ दिए, साईड से तेज़ी से निकलेंगे। यहां भी ब्रेक को ही आराम देते हैं, हार्न को नहीं। एक गाड़ी बैक होते समय गाना गा रही थी "पाछे हट जा, ताऊ हट जा"। अब पीछे गाड़ी तो खडी थी एक नवयौवना की और गाड़ी गाना गा रही थी ‘ताऊ हट जा’। उसके साथ-साथ हम भी चैंके कि आखिर लड़की ताऊ कैसे हो सकती है? वैसे आजकल पता भी नहीं चलता है कब लड़का-लड़की बन जाए, लेकिन लड़की और ताऊ? हंसिए मत, अब गाड़ी को कैसे पता कि पीछे कौन है? गाड़ी तो गाड़ी है, मालिक ने बोला और हो गई शुरू।

वैसे विदेशों की तरह हमारे देश में भी हार्न पर पाबंदी होती तो सोचो डाईवर के मनोरंजन का क्या होगा? अब सरकार किसी के मनोरंजन में दखल कैसे दे सकती है। फिर हार्न सुनकर ही तो राह चलते हुए लोगो को अपने फर्ज़ की याद आती है कि "ध्यान से चलें, वाहन कभी भी यमराज बन सकता है"।

चलिए इस उम्मीद के साथ अपना वाहन बंद करते है कि आपको हमारा "हार्न" पसंद आया होगा।

- शाहनवाज़ सिद्दीकी


 
[दैनिक समाचार पत्र "हरिभूमि" के आज के संस्करण में मेरा व्यंग्य]


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18 comments:

  1. बहुत ही उम्दा प्रस्तुती और सामाजिक समस्याओं को गंभीरता से उठाती हुई रचना के लिए धन्यवाद | वास्तव में ट्रेफिक पुलिस को ऐसे कर्ण फाडू और जानवर के कर्णप्रिय होर्न के विस्तार को रोकने के लिए अपने पुलिसिया कर्तव्य से ऊपर उठकर कुछ सामाजिक कर्तव्य और जिम्मेवारी को निभाना होगा |

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  2. धन्यवाद झा जी और अविनाश जी. उम्मीद करता हूँ कि आप लोग हमेशा इसी तरह मेरा मार्ग दर्शन और मदद करते रहेंगे.

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  3. कमाल लिखते हो शाहनवाज़ तुम भी!

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  4. पढ़ कर मज़ा आ गया ;)

    क्या कह रहे हो ट्रैफिक पुलिस? अरे यार ‘हफ्ता’ उनको कुछ सुनने-देखने देता है भला?

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  5. @शाहनवाज़ भाई

    बहुत ही उम्दा प्रस्तुती,पढ़ कर मज़ा आ गया

    महक

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  6. बहुत पसन्द आया जी यह "हार्न पुराण"
    व्यंग्य का प्रस्तुतिकरण भी बहुत अच्छा लगा

    प्रणाम स्वीकार करें

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  7. शाहजी आपने तो सारे हार्न इकठ्ठे ही बजा दिए

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  8. आपका हार्न इतना प्यारा है ही
    बजना ही था
    बहुत बहुत मुबारक

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  9. बढ़िया होर्न बजने पर बहुत-बहुत बधाई.

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  10. आपका हार्न इतना प्यारा है ही
    बजना ही था.........
    बहुत बहुत मुबारक.....

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  11. हार्न पुराण अच्‍छा रहा।

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  12. Bhagwan ka lakh-lakh shukra hai ki maine Itwar ke din apni gadi ka harn nahi bajaya.

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  13. saah bhai..........
    bahut accha laga isy pad kar..........

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  14. बहुत ही शानदार व्यंग है शाहनवाज़ भाई. आप यक़ीन कीजिये fb पर जो लोग व्यंग के नाम पर फूहड़पन परोसते है उसपर समझ नहीं आता है कि हंसें या रोएँ

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    1. शुक्रिया Izhar Arif भाई :)

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