सजा का मकसद केवल दोषी को सुधारना नहीं

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  • Shah Nawaz
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  • यह बिलकुल गलत तर्क है कि सजा का मकसद दोषी को सुधारना भर है, सजा का मकसद केवल दोषी को सुधारना नहीं बल्कि बाकी लोगो को गलत कार्य के प्रति चेताना भी होता है। मतलब बुरे काम का बुरा नतीजा आना आवश्यक है। अगर बुरे काम के भी अच्छे नतीजे आने लगे तो हर कोई बुराई के रास्ते पर बिना झिझक चलेगा और यही आज हो रहा है। अपराधी सोचते हैं कि वह पकडे नहीं जाएँगे और अगर पकडे भी गए तो सालो-साल केस चलता रहेगा और अगर सजा हुई भी तो बहुत थोड़ी सी। हालाँकि सिर्फ सज़ा देने भर ही अपराध कम नहीं हो पाएँगे, बल्कि हमें यह भी विचार करना होगा कि हमारे सामाजिक ताने-बाने में कहाँ कमी है?

    साथ ही साथ यह भी सुनिश्चित किया जाना ज़रूरी है कि न्याय जल्दी मिल पाए और सजा ऐसी होनी चाहिए जिसके खौफ से दुसरे लोग भी ऐसे घिनौने काम करते हुए डरे।

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